जमशेदपुर : बिष्टुपुर स्थित सिंहभूम जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन/तुलसी भवन में चल रहे 9वें भोजपुरी नाट्य महोत्सव के दूसरे एवं अंतिम दिन, रविवार को लगातार तीन भोजपुरी नाटकों का मंचन हुआ. इनमें पहले नाटक के रूप में ब्रह्मेश्वर नाथ तिवारी रचित हास्य-व्यंग्य नाटक ‘शनि के साढ़ेसाती’ की प्रस्तुति जोरदार रही. इस नाटक के माध्यम से अंधविश्वास पर जबरदस्त प्रहार करते हुए दिखाया गया कि कैसे धर्म, वास्तु और शुभ-अशुभ बताने की आड़ में पेशेवर तांत्रिक और वास्तु विशेषज्ञ यजमान को मूर्ख बनाकर और डराकर ठगने का काम करते हैं. (नीचे भी पढ़ें)

आज की दूसरी प्रस्तुति के रूप में जमशेदपुर की ‘मंच’ संस्था द्वारा अनिता सिंह के निर्देशन में विशु बासु कृत मूल बांग्ला हास्य व्यंग्य नाटक “शांति रक्षक” के भोजपुरी अनुवाद, ‘अमन के रखवार’ का मंचन हुआ. इस नाटक का भोजपुरी में अनुवाद किया है स्व विपुल चौधरी और डॉ महेंद्र प्रसाद सिंह ने. पुलिस प्रशासन पर करारा प्रहार करते इस नाटक में दिखाया गया है कि कैसे एक कर्त्तव्यनिष्ठ युवा, जो रास्ते में मिले एक पर्स को थाने में जमा कराने जाता है, को बुरी तरह प्रताड़ित किया जाता है. हर संवाद पर हास्य पैदा करने वाले इस नाटक के मुख्य किरदार दारोगा ज़ालिम सिंह की भूमिका में विनोद कुमार प्रभावी रहे. गणेश की भूमिका में रौशन कुमार, डाकमुंशी गोबरधन के रूप में अंशु पाठक, शिवपूजन सिपाही के रूप में संजीत प्रजापति और रामभजन की भूमिका में राहुल कुमार आर्य का अभिनय भी सराहनीय रहा. पार्श्व ध्वनि व प्रकाश व्यवस्था का दायित्व कृष्णा सिन्हा ने संभाला. (नीचे भी पढ़ें)
महोत्सव का समापन रंगश्री की प्रस्तुति अरविंद विद्रोही कृत भोजपुरी हास्य व्यंग्य नाटक “कब्रिस्तान के उद्घाटन” के असरदार मंचन के साथ हुआ. इस नाटक को निर्देशित किया रंगश्री के संस्थापक डॉ महेंद्र प्रसाद सिंह ने. यह नाटक उन राजनेताओं पर एक व्यंग्य है जो सस्ती लोकप्रियता पाने एवं सत्ता में बने रहने के लिए अपने मतदाताओं को झूठे नारे एवं तरह-तरह के वादों से भरमाते हैं और अपना उल्लू सीघा करते हैं. नाटक में मुख्यमंत्री का एक संवाद था, “अपना लोकतंत्र झूठे और लुभावने नारों पर चलता आ रहा है. लोगों को आश्वासन, नारा और जाति-धर्म पर टांग कर रखना राजनीति का धर्म है.” इस नाटक में भ्रष्ट राजनीति के विभिन्न आयामों को हंसी-हंसी में बड़े बेहतरीन तरीके से दिखाया गया जिसे देख दर्शक ठहाके लगाते, पेट पकड़े बैठे रहे. (नीचे भी पढ़ें)
नाटक में मुख्यमंत्री की भूमिका में अखिलेश कुमार पांडे, पीए की भूमिका में स्वयं डॉ महेंद्र प्रसाद सिंह, हिजड़े, मुस्लिम लीडर व डीसी की भूमिका में क्रमश: श्री सौमित्र वर्मा, विजय व रुस्तम कुमार, बेरोजगार संघ के अध्यक्ष की भूमिका में कृति कुमारी, महामंत्री की भूमिका में कीर्ति यादव, गार्ड/ सिपाही/अधिकारी की भूमिका में विनय कांत चपरासी की भूमिका में प्रभात रंजन, मुर्दा की भूमिका में रुस्तम कुमार, ऑफिसर व बेरोजगार संघ के संयुक्त सचिव की भूमिका में अशोक प्रभावी रहे. प्रकाश व्यवस्था संदीप कुमार एवं संगीत संयोजन कीर्ति यादव का था. दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया. (नीचे भी पढ़ें)
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से आयोजित 9वें भोजपुरी नाट्य महोत्सव के समापन के अवसर पर रंगश्री के अध्यक्ष व निर्देशक डॉ महेन्द्र प्रसाद सिंह ने संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के साथ ही सिंहभूम जिला भोजपुरी साहित्य परिषद्, तुलसी भवन और जमशेदपुर के सभी सुधी दर्शकों का हृदय से आभार जताया. इस अवसर पर पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता एवं मानगो मेयर सुधा गुप्ता की उपस्थिति ने कलाकारों का उत्साह बढ़ाया.



