जमशेदपुर : टाटा स्टील फाउंडेशन के दिशा कार्यक्रम के आठवें दीक्षांत समारोह का आयोजन 8 फरवरी को जमशेदपुर के एक्सएलआरआइ ऑडिटोरियम में किया गया, जिसमें 545 महिलाओं ने सफलता का जश्न मनाया. महिलाओं के नेतृत्व को सशक्त बनाने और हाशिए पर मौजूद समुदायों के उत्थान के संकल्प के साथ, दिशा समाज में समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. अब तक 7000 से अधिक महिलाओं ने इस कार्यक्रम से जुड़कर अपनी क्षमता को निखारा है, जिनमें से झारखंड और ओडिशा की 5342 महिलाएं प्रशिक्षण पूरा कर सशक्त भविष्य की ओर बढ़ रही हैं. इस दीक्षांत समारोह की थीम ‘प्रबुद्ध समतामूलक समाज’ थी, जिसमें ग्रामीण महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया गया-कैसे वे जागरूकता और समानता की नींव पर एक नए समाज का निर्माण कर रही हैं. (नीचे भी पढ़ें)
दिशा का नेतृत्व प्रशिक्षण इस बदलाव में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जहां महिलाओं को संचार, निर्णय लेने और रणनीतिक सोच जैसे कौशलों से सशक्त बनाया जा रहा है. यह कार्यक्रम न केवल महिलाओं को नेतृत्व की ओर अग्रसर कर रहा है, बल्कि समाज में गहरी जड़ें जमा चुकी लैंगिक बाधाओं को भी तोड़ रहा है. दिशा विविधता और समावेशिता को प्रोत्साहित करते हुए महिलाओं को अपने समुदाय में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए सक्षम बना रहा है, जिससे वे न केवल अपने बल्कि पूरे समाज के भविष्य को नया आकार दे सकें. इस अवसर पर टाटा स्टील फाउंडेशन के सीइओ सौरव रॉय, जेंडर एंड कम्यूनिटी इंटरप्राइज की लीड स्मिता वर्मा और लीड कम्यूनिकेशन शुभ्रा आर सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे. (नीचे भी पढ़ें)
सौरव रॉय ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, यह गर्व की बात है कि झारखंड और ओडिशा की महिलाएं दिशा के नेतृत्व कार्यक्रम के तहत न केवल प्रशिक्षण ले रही हैं, बल्कि अपने समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए बड़े और साहसिक कदम उठा रही हैं. दिशा सिर्फ आर्थिक निर्णय लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अपनी क्षमता को पहचानने, सामाजिक प्रवृत्तियों के बीच खुद को मजबूत बनाने और दूसरों के जीवन में मूल्य जोड़ने की एक प्रेरक यात्रा है. वित्तीय वर्ष 2022 में शुरू की गई इस पहल का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में छह हजार महिलाओं को उनके समुदायों में बदलाव का वाहक बनाना है. यह कार्यक्रम सामाजिक, राजनीतिक और डिजिटल सशक्तिकरण के माध्यम से महिलाओं को मजबूत बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है. टाटा स्टील फाउंडेशन के समर्थन से संचालित दिशा कार्यक्रम महिलाओं के नेतृत्व कौशल को विकसित करने में रणनीतिक रूप से निवेश करता है, जिससे उनमें आत्मविश्वास बढ़े और वे सामाजिक संस्थानों में सक्रिय भागीदारी निभा सकें. (नीचे भी पढ़ें)
यह पहल समुदायों में आदर्श नेतृत्व विकसित करने पर केंद्रित है, जिससे महिलाएं समाज और निर्णय-निर्माण संस्थाओं में प्रभावी भूमिका निभा सकें. साथ ही, यह मानवाधिकारों, लैंगिक समानता और विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों की मजबूत वकालत का मार्ग प्रशस्त करता है. इन महिलाओं की सशक्तिकरण यात्रा एक सुव्यवस्थित और प्रभावी प्रशिक्षण प्रक्रिया से होकर गुजरती है, जिसमें हर वर्ष छह चरणों में कार्य-आधारित प्रशिक्षण शामिल होते हैं. यह प्रशिक्षण न केवल नेतृत्व क्षमता और संघर्ष समाधान कौशल को विकसित करता है, बल्कि समाज में शांति, समावेशन और संवेदनशीलता को भी बढ़ावा देता है. लैंगिक समानता को मुख्यधारा में लाने और महिलाओं को उनके अधिकारों, हिंसा से बचाव और सरकारी लाभों की जानकारी देने के लिए औपचारिक साक्षरता प्रशिक्षण एक महत्वपूर्ण पहलू है. इसके साथ ही, महिलाओं को प्रभावी संचार और डिजिटल साक्षरता के माध्यम से सशक्त बनाकर, उन्हें नेटवर्किंग और प्रभावी वकालत में सक्षम बनाया जाता है, जिससे उनकी आवाज़ और सामाजिक प्रभाव दोनों मज़बूत होते हैं. इसके अतिरिक्त, सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए ग्राम विकास योजनाओं और पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआइ) से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि महिलाएं नीति निर्माण और सामुदायिक विकास में सक्रिय भूमिका निभा सकें.


