जमशेदपुर : आदिवासी समुदाय का सेंदरा शिकार पर्व को लेकर तैयारियों के बीच डीएफओ सबा आलम अंसारी ने अहम बैठक की है. मानगो के रेंज ऑफिस में यह मीटिंग की गयी है. इसमें कहा गया है कि वे लोग किसी भी हाल में शिकार होने नहीं देंगे. परंपरा को वे लोग निभाने देंगे, लेकिन जंगली जानवरों का शिकार होने नहीं देंगे. वन विभाग ने इसको लेकर तैयारी की है. सेंदरा पर्व में शिकार रोकने के लिए जमशेदपुर, सरायकेला और आदित्यपुर के सामाजिक वानिकी वन प्रमंडलों के पदाधिकारियों व कर्मचारियों को तैनात किया गया है. पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिलों के उपायुक्तों व पुलिस अधीक्षकों तथा राची, चक्रधरपुर, खड़गपुर, आद्रा रेल मंडलों से सहयोग मांगा गया है. पटमदा, बोड़ाम, चांडिल, नीमडीह समेत सभी संवेदनशील क्षेत्रों में चिकित्सा व पशु चिकित्सा पदाधिकारियों को तैनात किया गया है. वन विभाग ने शिकार पर्व में आदिवासी समुदाय से अपील की है कि वे लोग पारंपरिक विशु पर्व को घर पर सांकेतिक रूप से मनाएं और वन्य प्राणियों का शिकार न करें. (नीचे भी पढ़ें)
चार और पांच मई को दलमा में सारे लोग जायेंगे. इसे लेकर पहले से तैयारी की गयी है. विशेष चिकित्सा व्यवस्था की गयी है, जबकि सभी थाना के प्रभारियों को भी अलर्ट किया गया है. मजिस्ट्रेट और सशस्त्र बल को तैनात किया गया. छह सूचना केंद्र स्थापित किये गये हैं. सारे एसडीओ से मदद मांगी गयी है. शिकारियों को रोकने के लिए 11 चेकनाका और दलमा में जाने वाले 17 रास्तों पर वनकर्मियों और पदाधिकारियों की तैनाती की गयी है. 55 से अधिक वनकर्मियों और भारतीय वन सेवा के 10 तथा राज्य वन सेवा के दो अधिकारियों को इसके लिए तैनात किया गया है. दलमा के इको विकास समितियों के साथ बैठक कर दिशा निर्देश दिये गये हैं. वन विभाग और इको विकास समिति के लोग गश्ती कर जाल फांस को बरामद कर रहे है. संसाधनों के लिए विभिन्न प्रमंडलों से वाहन भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं. इस मौके पर डीएफओ सबा आलम अंसारी के अलावा रेंज अफसर दिनेश चंद्रा, अपर्णा चंद्रा सहित अन्य लोग मौजूद थे.



