रांची : आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र की समस्याओं को लेकर गुरुवार को आदित्यपुर स्मॉल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (एसिया) के एक प्रतिनिधिमंडल ने अध्यक्ष इंदर कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में उद्योग सचिव अरवा राजकमल से मुलाकात कर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा. इसके माध्यम से उद्यमियों ने आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र की प्रमुख ज्वलंत समस्याओं का निदान कराने की मांग की. साथ ही, कहा कि संबंधित समस्याओं के कारण राज्य के औद्योगिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. उद्यमियों ने उम्मीद जताई कि उद्योग सचिव के सार्थक प्रयास से हम पुनः अपने औधोगिक क्षेत्र पर गर्व कर सकेंगे, क्योंकि इन समस्याओं के कारण स्थानीय उद्यमी बाहरी निवेशकों को नहीं बुला पा रहे हैं, जिससे अपने प्रदेश के विकास के साथ- साथ रोज़गार व राजस्व भी प्रभावित हो रहा है. (नीचे भी पढ़ें)
इस दौरान उद्योग सचिव ने एसिया की टीम के साथ बिन्दुवार वार्ता की, साथ ही विभिन्न विभागों से संबंधित उद्योगों की समस्याओं का निदान कराने के लिए सार्थक पहल कराने का भरोसा दिलाया. उद्योग सचिव ने बताया कि जियाडा के पास अभी भी 1044 एकड़़ भूमि उपलब्ध है. उद्योग विभाग द्वारा जियाडा के पास उपलब्ध भूमि को चिह्नित कर नए उद्योगों की स्थापना के लिए भूमि का आवंटन करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. साथ ही जियाडा में नए प्रबन्ध निदेशक का पदस्थापन होने के बाद आदित्यपुर के उद्यमियों के साथ परिचयात्मक बैठक आहूत की जाएगी. उक्त बैठक में राज्य के मुख्यमंत्री के साथ उद्यमियों की बैठक की तिथि भी निर्धारित की जाएगी. मांग पत्र में इस बात का उल्लेख है कि आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र की वैसी औद्योगिक इकाइयां, जो किसी कारणवश रुग्ण अथवा बन्द हो चुकी हैं, उन्हें जियाडा द्वारा डीओपी नहीं दिया जा रहा है. विगत छह वर्ष से ज्यादा समय से यह मुद्दा राज्य सरकार और उद्योग विभाग के पास लंबित है. जमीन के अभाव में रुग्ण अथवा बन्द हो चुकी इकाइयों की जमीन के अभाव में दूसरे लोगों को बिक्री तो हो जाती है, परन्तु डीओपी नहीं मिलने के कारण जियाडा में उनका नाम ट्रांसफर नहीं हो पाता है. परिणामस्वरुप संबंधित उद्योगों को किसी वित्तीय संस्थान से वित्तीय सहायता नहीं मिल पाती है, तथा संबंधित उद्योग का विकास रुक जाता है. इसकी वजह से क्षेत्र के विकास के साथ- साथ रोजगार भी प्रभावित हो रहा है. (नीचे भी पढ़ें)
मुलाकात के दौरान आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र की सड़कों का पुनर्निर्माण कराने की मांग भी की गई है. मांग पत्र में इस बात का उल्लेख है कि पिछली सरकार की अमृत योजना के तहत विभिन्न एजेंसियों द्वारा पाईप लाइन और बिजली का केबल बिछाने के नाम पर संपूर्ण औधोगिक क्षेत्र की सड़कों को पूर्णतः क्षतिग्रस्त कर दिया गया है. जियाडा या उनके द्वारा बार-बार आग्रह किये जाने के बाद भी संवेदक क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत नहीं करा रहे हैं. वहीं, क्षतिग्रस्त सड़कों की वजह से अक्सर होने वाली दुर्घटनाओं में जान-माल की क्षति हो रही है. उद्योग सचिव ने कहा कि जल्द ही जियाडा के लिए एक अच्छे और अनुभवी एमडी की नियुक्ति की जाएगी. उन्होंने कहा कि वह जल्द ही आदित्यपुर आकर उपायुक्त एवं पुलिस अधीक्षक के साथ ही उद्यमियों के साथ भी बैठक कर उनकी समस्याएं सुलझाने का प्रयास करेंगे. उद्योग सचिव ने कहा कि वे जल्दी ही आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र के उद्यमियों के साथ मुख्यमंत्री की झारखंड के औद्योगिक विकास के निमित्त एक बैठक भी कराएंगे. (नीचे भी पढ़ें)
डीओपी के बारे में उन्होंने कहा कि जल्द ही इस समस्या का समाधान निकालने की कोशिश करेंगे ताकि जितनी भी इंडस्ट्री इसके चलते प्रभावित हैं उनका जल्दी समाधान हो सके. उन्होंने झारखंड सरकार का फोकस इंडस्ट्री पर होने की बात बताते हुए इसको बढ़ावा देने के लिए कई सारे कदम उठा रहे हैं. उन्होंने कहा कि लैंड बैंक के लिए भी काम किया जा रहा है और आदित्यपुर इंडस्ट्रियल एरिया में 1000 एकड़ से ज्यादा लैंड अनऑक्युपाइड दिख रहा है जिसकी अब तक की अद्यतन जानकारी लेकर इसके आवंटन की प्रक्रिया शुरू कराएंगे. टीम में एसिया के अध्यक्ष इंदर कुमार अग्रवाल के अलावा महासचिव प्रवीण गुटगुटिया, देवांग गांधी और पिंकेश महेश्वरी शामिल थे.




