नयी दिल्ली : देश के आर्थिक तौर पर सबसे मजबूत राज्य गुजरात के अहमदाबाद में हुए भीषण विमान हादसे में कई लोग मारे गये है. देश में ऐसे कई हादसे होते रहे है. खास तौर पर एयर इंडिया का विमान काफी जगहों पर दुर्घटनाग्रस्त होता रहा है. इसके अलावा भी कई कंपनियों का फ्लाइट दुर्घटना का शिकार होता रहा है. (नीचे भी पढ़ें)
16 अगस्त 1991 को हादसे में 69 लोगों की हुई थी मौत
16 अगस्त 1991 को मणिपुर के इंफाल के पास इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट संख्या 257 दुर्घटनाग्रस्त हो गयी थी, जिसमें 69 लोगों की मौत हो गयी थी. वही, 26 अप्रैल 1993 को इंडियन एयरलाइंस के फ्लैट 491 दुर्घटनाग्रस्त हो गयी थी, जो महाराष्ट्र के औरंगाबाद में हादसा हुआ था, जिसमें 55 लोगों की मौत हुई थी. 12 अक्तूबर 1976 को इंडियन एयरलाइंस के फ्लाइट संख्या 171 मुंबई के पास हादसे का शिकार हो गयी थी, जिसमें इंजन फेल हो गया था और विमान पर सवार 95 लोगों की मौत हो गयी थी. 1 जनवरी 1978 को कॉकपिट में यंत्र की विफलता के बाद कैप्टन का दिशा भ्रमित हो गया और बांबे के तट के पास बांद्रा में एयर इंडिया के फ्लाइट संख्या 855 दुर्घटना हो गया था, जिसमें सभी 213 लोगों की मौत हो गयी थी. 19 अक्तूबर 1988 को इंडियन एयरलाइंस के फ्लाइट संख्या 113 हादसे का शिकार हुई थी, जिसमें 130 लोगों की मौत हुई थी. पायलट की गलती के कारण यह फ्लाइट अहमदाबाद एयरपोर्ट पर लैंडिंग के वक्त दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. इसी तरह इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट संख्या 605 14 फरवरी 1990 को बंगलुरु में लैंडिंग के वक्त एयरपोर्ट पर ही दुर्घटना का शिकार हो गयी थी, जिसमें 92 लोगों की मौत हो गयी थी. केएलएम लाकहीड कांस्टेलेशन विमान घाटकोबर के पास 12 जुलाई 1949 को हादसा हुआ था, जिसमें 45 लोगों की मौत हो गयी थी, जिसमें 35 यात्री और दस चालक दल थे. (नीचे भी पढ़ें)
बताया जाता है कि खराब मौसम में लैंडिंग के वक्त यह हादसा हुआ था, जिसमें अमेरिका के पत्रकार एचआर निकलबोकर की मौत हो गयी थी. 14 जून 1972 को जापान एयरलाइंस फ्लाइट का हादसा का शिकार हो गया था, जिसमें 85 लोगों की मौत हो गयी थी. 82 यात्री और 3 लोगों की जमीन पर मौत हो गयी थी. पालम एयरपोर्ट के पास यह हादसा हुआ था. भारत लेट डाउन प्रक्रिया की अनदेखी के कारण फाल्स ग्लाइ पाथ सिग्नल के कारण यह हादसा हुग़ा था. 31 मई 1973 को पालम एयरपोर्ट पर ही लैंडिंग के वक्त हादसे का शिकार हो गया था, जिसमें 65 यात्री की मौत हो गयी थी. पायलट की यह गलती थी, जिससे इतने लोगों की जान चली गयी थी. 7 अगस्त 2020 को कोझीकोड में विमान हादसा हुआ था, जिसमें एयर इंडिया एक्सप्रेस बोइंग 737 800 विमान हादसे का शिकार होगया था, जिसमें 17 यात्री और दोनों पायलट समेत मौत हो गयी थी. 138 लोग घायल हो गये थे. रनवे पर रुकने में असफल होने के कारण विमान 100 फीट गहरी घाटी में गिर गयी थी. 3 नवंबर 1950 को एयर इंडिया फ्लाइट 245 फ्रांस एल 749 ए लॉकहीड हादसे का शिकार हो गयी थी, जिसमें 48 लोगों की मौत हो गयी थी. खराब मौसम और नेविगेशन में गड़बड़ी के कारण मुंबई के पास हादसा हुआ था. यह प्लेन लंदन से मुंबई जा ही थी. (नीचे भी पढ़ें)
जेनेवा में उतरने से पहले माउंट ब्लांक के ग्लेशियर से टकरा गयी थी. 24 जनवरी 1966 को एयर इंडिया फ्लाइट 101 को हादसे का शिकार हुई थी, जिसमें 117 लोगों की मौत हो गयी थी. यह हादसा भी माउंट ब्लांक के पास हुआ था. ग्लेशियर से यह प्लेन टकरा गया था, जिसम पर परमाणु वैज्ञानिक डॉ होमी जहांगीर भाभा भी सवार थे. 1 जनवरी 1978 को एयर इंडिया फ्लाइट 855 मुंबई के अरब सागर में हादसे का शिकार हो गयी थी, जिसमें 3 किलोमीटर दूर अरब सागर में विमान टूक गया था, जिससे 213 लोगों की मौत हो गयी थी. 21 जून 1982 को एयर इंडिया की फ्लाइट मुंबई के बोइंग 707 लैंडिंग के वक्त विमान रनवे से पिसल गया था. इसमें 99 यात्री सवार थे, जिसमें से 12 चालक दल में से दो के अलावा 15 यात्री की मौत हो गयी थी. 23 जून 1985 को एयर इंडिया की फ्लाइट अयरलैंड के तट के पास अटलांटिक महासागर के ऊपर कार्गो में रखा बम फट गया था. यह उड़ान लंदन, फिर दिल्ली और मुंबई जा रही थी. आतंकियों ने इस घटना को अंजाम दिया था. बब्बर खालसा के उग्रवादियों ने इस हादसे को अंजाम दिया था, जिसमें 329 लोगों की मौत हो गयी थी. 22 मई 2010 को एयर इंडिया एक्सप्रेस फ्लाइट 812 भी मंगलोर के पास हादसे का शिकार हुई थी, जिसमें 158 लोगों की मौत हो गयी थी. यह उड़ान दुबई से मंगलौर आ रही थी और लैंडिंग के दौरान रनवे से आगे निकल गई, जिसके बाद यह एक पहाड़ी से टकरा गई. इसके बाद विमान में आग लग गई. जांच में पायलट की गलती को मुख्य वजह माना गया.



