जमशेदपर : जमशेदपुर के सिदगोड़ा थाना क्षेत्र शिव सिंह बागान सी रोड में बुधवार को विवादित जमीन पर टाटा स्टील ने अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया. इस दौरान शिव सिंह बागान सी रोड में बनी बाउंड्रीवाल को तोड़ते हुए वहां की तीन दुकानें और दुकानों में रखी सामानों को जमींदोज कर कब्जामुक्त कराया गया. जानकारी के अनुसार इस जमीन का मामला लंबे समय से न्यायालय में विचाराधीन था. (नीचे भी पढ़ें)

हाल ही में अदालत ने टाटा स्टील के पक्ष में फैसला सुनाया, जिसके बाद प्रशासन ने उस जमीन को खाली करने के लिए नोटिस जारी किया था. समय खत्म होने के बाद बुधवार को टीम भारी पुलिस बल और बुल्डोजर के साथ मौके पर पहुंची और उक्त जमीन को बुल्डोजर चलवाकर कब्जा मुक्त कराया. (नीचे भी पढ़ें)
दुकानदारों का विरोध रहा बेअसर: इस दौरान अवैध रूप से दुकान लगाकर कब्जा करने वाली नीतू सिंह ने बताया कि उन्हें जमींन खाली करने के लिए कोई नोटिस नहीं दिया गया था. उन्होंने अधिकारियों से कुछ और मोहलत देने की गुहार लगाई और कार्रवाई का विरोध किया. हालांकि, न्यायालय के सख्त आदेश और प्रशासनिक मुस्तैदी के आगे उनकी एक न चली. (नीचे भी पढ़ें)
जमीन पर कब्जा रखने वाले पक्ष का दावा : कार्रवाई के बाद जमीन पर कब्जा रखने वाले पक्ष की ओर से इसका जोरदार विरोध किया गया है. बताया जा रहा है कि संबंधित जमीन पर वर्ष 2009 से ही विभिन्न न्यायालयों में विवाद चल रहा है. मनोहर सिंह, मिस्टर पुरी और प्रभाकर सिंह के पक्ष का दावा है कि अब तक जिन न्यायालयों में मामले की सुनवाई हुई है, वहां उनके पक्ष में फैसला आया है. उक्त स्थल पर पिछले चार दशक से लोग घर बनाकर रह रहे है. इसी बीच 20 अगस्त को सिविल कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई निर्धारित थी. आरोप है कि सुनवाई से ठीक पहले बुधवार को प्रशासनिक टीम और टाटा स्टील के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में विवादित स्थल पर बुलडोजर चलाया गया. (नीचे भी पढ़ें)
कार्रवाई के बाद जमीन पर अपना कब्जा होने का दावा करने वाले पक्ष में आक्रोश फैल गया. उनका आरोप है कि जब मामला न्यायालय में विचाराधीन है और अगली सुनवाई की तारीख निर्धारित है, तो ऐसी स्थिति में प्रशासन द्वारा स्थल पर जाकर कार्रवाई किए जाने का औचित्य क्या है. पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता ने प्रशासन की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं. अधिवक्ता का कहना है कि यदि न्यायालय में मामला लंबित है और संबंधित पक्ष के पक्ष में पूर्व में आदेश पारित हुए हैं, तो प्रशासन द्वारा इस तरह की कार्रवाई किए जाने की न्यायिक जांच आवश्यक है. अधिवक्ता ने इसे न्यायालय की अवमानना से जुड़ा मामला बताते हुए कहा कि इस कार्रवाई के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा. जरूरत पड़ने पर मामला सर्वोच्च न्यायालय तक ले जाने की भी बात कही गई है.




