जमशेदपुर : कदमा स्थित डीबीएमएस कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन के सोशल साइंस क्लब की ओर से सोमवार को हुल दिवस पर मल्टीपरपज सभागार में कार्यक्रम आयोजित हुआ. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ जूही समर्पिता ने कहा कि सिद्धू-कान्हू, चांद-भैरव और फुलो-झानो ने संथाल ज़मींदारी को बचाने के लिए हुल क्रांति की शुरुआत की. उन्होंने कहा कि हमें अपना इतिहास कभी भूलना नहीं चाहिए. (नीचे भी पढ़ें)

बताते चलें कि हुल दिवस न केवल आदिवासी शौर्य का प्रतीक है, बल्कि यह एक मंच भी है जहां शक्ति का प्रदर्शन किया जाता है. हुल दिवस सिद्धू-कान्हू, चांद-भैरव और फुलो-झानो की उसी क्रांति की याद में मनाया जाता है. इस आयोजन में महाविद्यालय की प्राचार्या, उप प्राचार्या, शिक्षक गण के अलावा अन्य स्टाफ सदस्य और विद्यार्थी उपस्थित रहे. (नीचे भी पढ़ें)

कार्यक्रम के आरंभ में निकिता कुमारी एवं ज्योति कुमारी ने पूरे समारोह और इसके प्रतिभागियों की का परिचय कराया. कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों में शिवानी टुडू ने हिंदी एवं बेबी कुमारी ने अंग्रेजी में भाषण प्रस्तुत किया. रोहित पोद्दार, अलीजा समज एवं चांदमनी मुंडा ने पीपीटी प्रस्तुति दी जबकि मेघा तुड़ू ने संथाल कविता, किता तामसोय ने हिंदी कविता, आयशा माल्टो ने मलयालम कविता, मरियम माल्टो ने अंग्रेजी कविता प्रस्तुत की. अंत में बेबी रानी जेना के धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ. कार्यक्रम को सफल बनाने में महाविद्यालय की सचिव प्रिया धर्मराजन, सह सचिव सुधा दिलीप, प्राचार्या, उप प्राचार्या, सभी शिक्षक, ऑफिस स्टॉफ एवं विद्यार्थियों ने अपनी भूमिका बखूबी निभाई.



