जमशेदपुर : बेंगलुरु के येलहंका न्यू टाउन में स्थित मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन के हॉस्टल से गिरकर बीटेक द्वितीय वर्ष के छात्र लक्ष्य मिश्रा की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई. मृतक छात्र मूल रूप से जमशेदपुर के कदमा, भाटिया बस्ती का निवासी था. इस घटना के बाद लक्ष्य के पिता अंजनी मिश्रा, जो केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में कार्यरत हैं, ने संस्थान प्रशासन पर हत्या की गहरी साजिश रचने का सीधा आरोप मढ़ा है. पीड़ित पिता का कहना है कि उनके 19 वर्षीय बेटे की खुदकुशी की थ्योरी पूरी तरह मनगढ़ंत है, क्योंकि हॉस्टल की जिस खिड़की का हवाला दिया जा रहा है, वहां से किसी का भी स्वयं कूदना नामुमकिन है. उन्होंने आरोप लगाया कि कॉलेज प्रबंधन न केवल सच्चाई को दबा रहा है, बल्कि घटनास्थल के साक्ष्यों के साथ भी छेड़छाड़ कर रहा है. मृतक छात्र के पिता ने खड़े किए तीखे सवाल. मणिपाल यूनिवर्सिटी के छात्र लक्ष्य मिश्रा की मौत के मामले में उसके परिवार ने पुलिस और संस्थान की थ्योरी को कटघरे में खड़ा किया है. पिता अंजनी मिश्रा ने सवाल उठाया कि अगर पुलिस के मुताबिक उनका बेटा मंगलवार तड़के करीब 1:30 बजे नौवीं मंजिल से नीचे गिरा था, तो उसके शव पर वैसी गंभीर चोटें क्यों नहीं थीं जो इतनी ऊंचाई से गिरने पर अमूमन देखी जाती हैं? परिजनों ने यह भी शिकायत की है कि घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी उन्हें पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई है और सीसीटीवी फुटेज को भी उनसे छिपाया जा रहा है. (नीचे देखे पूरी खबर)

इसके अतिरिक्त, घटना के वक्त रूममेट की गैर-मौजूदगी और उसके विरोधाभासी बयानों ने मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया है, जिसके चलते निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की जा रही है. छात्र की संदिग्ध मौत पर राजनेताओं ने साधी चुप्पी साध रखी है, असहाय पिता बोले कि हम पूरी तरह अकेले पड़ गए हैं. न्याय की गुहार लगाते हुए पीड़ित परिवार ने सूबे के मुख्यमंत्री से लेकर कई कद्दावर नेताओं का दरवाजा खटखटाया. क्षेत्र के विधायक सरयू राय को भी लिखित पत्र सौंपकर मदद मांगी गई, लेकिन किसी भी बड़े राजनेता ने इस संवेदनशील मामले को गंभीरता से नहीं लिया. मृतक के पिता ने रोते हुए कहा कि आजकल राजनेता हर छोटे-बड़े मुद्दे पर राजनीति चमकाते हैं, लेकिन जमशेदपुर के एक होनहार नौजवान की संदिग्ध मौत पर सिर्फ एक औपचारिकता भरा द्वीट करके छोड़ दिया गया. बता दें कि 8 अप्रैल को बेंगलुरु में अंतिम संस्कार के बाद परिवार 10 अप्रैल को टूटकर जमशेदपुर वापस लौटा है.




