जमशेदपुर : जमशेदपुर मैनेजमेंट एसोसिएशन (जेएमए) ने यंग इंडियंस (वाइआइ) जमशेदपुर चैप्टर के साथ मिलकर “रीबूटिंग द एमएसएमईज़” पर एक सारगर्भित ज्ञानवर्धक सत्र का सफलतापूर्वक आयोजन किया. इस अवसर पर प्रो. शरद सारिन द्वारा लिखित पुस्तक “इन सर्च ऑफ़ एन आइडियल एमएसएमइ” का प्रमोशन भी किया गया. प्रो. सारिन आइआइएम अहमदाबाद के प्रतिष्ठित पूर्व छात्र, एक्सएलआरआइ जमशेदपुर के पूर्व संकाय सदस्य तथा आइआइएम इंदौर और हायर एजुकेशन फ़ोरम (एचइएफ) मुंबई से लाइफ़टाइम अचीवमेंट अवार्ड प्राप्त कर चुके हैं. (नीचे भी पढ़ें)
इस मौके पर एमएसएमइ लीडर्स, उद्यमियों और प्रबंधन पेशेवर उपस्थित थे. प्रो. सारिन ने अपनी पुस्तक से प्रेरणादायक विचार साझा किए, जिसमें ऐसे एमएसएमइ के लिए एक रोडमैप प्रस्तुत है जो लाभप्रदता और उद्देश्य को साथ लेकर चलना चाहते हैं. वास्तविक केस स्टडीज़ और प्रमाणित रणनीतियों से उदाहरण लेते हुए उन्होंने एमएसएमइ क्षेत्र के सामने मौजूद महत्वपूर्ण चुनौतियों पर प्रकाश डाला और आज के गतिशील व्यावसायिक माहौल में आगे बढ़ने के लिए ठोस एवं क्रियान्वयन योग्य सुझाव प्रदान किए. (नीचे भी पढ़ें)
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो. सारिन ने ज़ोर देकर कहा कि सबसे सस्टेनेबल एमएसएमइ वही हैं, जो एक स्पष्ट उद्देश्य के साथ काम करते हैं, लोगों में निवेश करते हैं और लगातार नवाचार करते रहते हैं, साथ ही लाभप्रदता को भी संतुलित रखते हैं. उनके विचार प्रतिभागियों के बीच गहराई से गूंज उठे, और कई उपस्थित लोगों ने उत्साहपूर्वक प्रश्नोत्तर सत्र में भाग लेते हुए चर्चा किए गए सिद्धांतों के व्यावहारिक अनुप्रयोगों को समझने का प्रयास किया. (नीचे भी पढ़ें)
जमशेदपुर मैनेजमेंट एसोसिएशन के चेयरमैन चैतन्य भानु ने प्रो. सारिन को सम्मानित किया और प्रबंधन शिक्षा तथा एमएसएमइ पारिस्थितिकी तंत्र में उनके योगदान की सराहना की. उन्होंने कहा कि ऐसे सत्र व्यवसायिक लीडर्स को प्रतिस्पर्धी बने रहने के साथ-साथ समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालने के लिए आवश्यक ज्ञान और साधन उपलब्ध कराते हैं. कार्यक्रम का समापन एक उत्साहपूर्ण इंटरेक्टिव नेटवर्किंग सत्र के साथ हुआ. (नीचे भी पढ़ें)
इस दौरान प्रतिभागियों ने न केवल अपने अनुभव साझा किए बल्कि एक-दूसरे से सीखने और भविष्य में संभावित सहयोग के अवसरों पर भी चर्चा की. साथ ही, सभी ने इस बात पर विचार किया कि सत्र से प्राप्त ज्ञान और सीख को अपने-अपने उद्यमों में कैसे व्यवहारिक रूप से लागू किया जा सकता है.











