जादूगोड़ा : भूमिज भाषा को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पहचान दिलानेवाले अनिल सिंह मुण्डा (55 वर्ष) का हृदय गति रुक जाने से निधन हो गया है. उन्होंने रायरंगपुर अस्पताल में इलाज के दौरान अंतिम सांस ली. ज्ञात हो कि श्री मुंडा विगत बुधवार, 20 मई को ओड़िशा के गोरुमाहिसानी स्थित करलाबनी गांव स्थित अपने घर में दोपहर के समय नहाने के दौरान अचानक जमीन पर गिर पड़े थे. इसके बाद उन्हें इलाज के लिए रायरंगपुर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान हृदय गति रुक जाने के कारण उनका निधन हो गया. श्री मुंडा का उनके गांव करलाबनी में अंतिम संस्कार कर दिया गया, स्व मुंडा के बड़े पुत्र ने उन्हें मुखाग्नि दी. उनके अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए. (नीचे भी पढ़ें)

झारखंड से आदिवासी भूमिज समाज के राष्ट्रीय महासचिव दिनेश सरदार ने करलाबनी जाकर अनिल सिंह मुंडा के अंतिम दर्शन कर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किये. इस अवसर पर उन्होंने भूमिज समाज की ओर से संगठन के विद दिरि झंडा भी उनके पार्थिव शरीर पर ओढ़ाया. इस मौके पर समाज के बुद्धिजीवियों एवं समाज बंधुओं ने दो मिनट का मौन धारण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. उनके अतिम अंतिम संस्कार में भारतीय आदिवासी भूमिज समाज के पूर्व अध्यक्ष पाईको सिंह, केन्द्रीय संगठन सचिव गीता मनी सिंह, सदस्य महेन्द्र नाथ सिंह, गदाधर सिंह, रामचंद्र सिंह सरदार, टोटन सरदार आदि भी पहुंचे. (नीचे भी पढ़ें)
अनिल सिंह मुंडा के असामयिक निधन से जादूगोड़ा-पोटका का भूमिज समाज मर्माहत है. आदिवासी भूमिज समाज के राष्ट्रीय महासचिव दिनेश सरदार (जादूगोड़ा) ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उनके निधन को समाज के लिए अपूरणीय क्षति बताया. उन्होंने कहा कि समाज के प्रति उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता. श्री सरदार ने कहा कि भूमिज भाषा का यूनिकोड सॉफ्टवेयर बनाकर उसे डिजिटल युग में पहुंचाने में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता. उन्होंने आगे कहा कि भूमिज-समाज के भूमिज भाषा को भारत सरकार के कॉपीराइट निबंधित कराया, जिसके कारण झारखंड राज्य में द्वितीय राजभाषा की मान्यता मिलना संभव हो पाया व भूमिज लिपि ओल अनोल को कानूनी मान्यता एवं संरक्षण प्राप्त हो सका.







