जमशेदपुर : जमशेदपुर स्थित सीएसआइआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनएमएल) में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ई-वेस्ट पुनर्चक्रण विषयक मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह आयोजित हुआ. अपशिष्ट प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (पीसीबी) पुनर्चक्रण पर मास्टर ट्रेनर्स एवं एक्सेलेरेटर्स के लिए पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन शुक्रवार को सीएसआइआर-एनएमएल में संपन्न हुआ. यह कार्यक्रम 1 जून से 5 जून 2026 तक भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय एवं मिशन लाइफ के अंतर्गत “ई-वेस्ट प्रबंधन हेतु अनौपचारिक क्षेत्र क्षमता निर्माण” विषय पर आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम का आयोजन जमशेदपुर सीएसआइआर-एनएमएल, हैदराबाद सी-मैट तथा भुवनेश्वर स्थित सिपेट-एलएआरपीएम द्वारा संयुक्त रूप से किया गया. (नीचे भी पढ़ें)

सीएसआइआर-एनएमएल के निदेशक डॉ संदीप घोष चौधरी के संबोधन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई. उन्होंने ई-वेस्ट पुनर्चक्रण क्षेत्र में अनौपचारिक गतिविधियों के बढ़ते प्रभाव तथा उन्हें वैज्ञानिक, सुरक्षित एवं पर्यावरण-अनुकूल ढांचे में लाने की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने कहा कि ई-वेस्ट पुनर्चक्रण केवल कचरा प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संसाधन पुनर्प्राप्ति, पर्यावरण संरक्षण एवं आजीविका सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है. इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ऐसे प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स तैयार करना था, जो आगे चलकर देश भर के लगभग 15,000 अनौपचारिक ई-वेस्ट पुनर्चक्रण कर्ताओं को प्रशिक्षित कर सुरक्षित, वैज्ञानिक एवं संगठित पुनर्चक्रण पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित कर सकें. कार्यक्रम का उद्देश्य वैज्ञानिक पुनर्चक्रण ज्ञान को जमीनी स्तर पर कार्यरत अनौपचारिक पुनर्चक्रण नेटवर्क से जोड़ना था. (नीचे भी पढ़ें)
भारत में ई-वेस्ट संग्रहण एवं विखंडन (डिसमेंटलिंग) में अनौपचारिक क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है, क्योंकि इसके पास स्थानीय कबाड़ी नेटवर्क एवं व्यापक संग्रहण व्यवस्था उपलब्ध है. किंतु इस क्षेत्र में तकनीकी ज्ञान, सुरक्षा उपायों, प्रदूषण नियंत्रण प्रणालियों एवं वैज्ञानिक पुनर्चक्रण विधियों का अभाव देखा जाता है. परिणामस्वरूप खुले में जलाना, असुरक्षित विखंडन, अनियंत्रित रासायनिक उपचार तथा अवशेषों का अनुचित निपटान जैसी प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं, जो पर्यावरण एवं मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होने के साथ-साथ मूल्यवान धातुओं की पुनर्प्राप्ति को भी प्रभावित करती हैं. इसलिए प्रशिक्षण कार्यक्रम में मास्टर ट्रेनर्स को व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक जानकारी प्रदान की गई, जिससे वे अनौपचारिक पुनर्चक्रण समूहों तक सही ज्ञान पहुंच सके. (नीचे भी पढ़ें)
कार्यक्रम के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि ई-वेस्ट को केवल अपशिष्ट नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण द्वितीयक संसाधन के रूप में देखा जाना चाहिए. अपशिष्ट प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (पीसीबी) ई-वेस्ट के सबसे मूल्यवान एवं जटिल घटकों में से एक हैं, जिनमें तांबा, एल्युमिनियम, सोना जैसी धातुओं के साथ प्लास्टिक एवं सेरेमिक पदार्थ भी मौजूद होते हैं. इसलिए इनके वैज्ञानिक प्रसंस्करण एवं पूर्व-उपचार के बिना प्रभावी पुनर्चक्रण संभव नहीं है. प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को ई-वेस्ट पुनर्चक्रण की सम्पूर्ण प्रक्रिया, संग्रहण, छंटाई, डिसमेंटलिंग, पूर्व-उपचार तथा मूल्यवान धातुओं की पुनर्प्राप्ति आदि के बारे में सरल एवं व्यावहारिक जानकारी दी गई. साथ ही, खुले में जलाने, असुरक्षित लीचिंग तथा अनुचित निपटान जैसी हानिकारक प्रक्रियाओं के दुष्प्रभावों से भी अवगत कराया गया. (नीचे भी पढ़ें)
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण व्यावहारिक प्रदर्शन एवं हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण रहा. यह कार्यक्रम केवल प्रयोगशाला प्रदर्शन तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका उद्देश्य मास्टर ट्रेनर्स का आत्मविश्वास बढ़ाना भी था ताकि वे देश के विभिन्न भागों में अनौपचारिक पुनर्चक्रण कर्ताओं को प्रशिक्षित कर सकें. कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि अनौपचारिक क्षेत्र को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि उसके पास पहले से ही संग्रहण नेटवर्क, सामग्री तक पहुंच एवं मानव संसाधन उपलब्ध हैं. आवश्यकता केवल उन्हें वैज्ञानिक प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक एवं सुरक्षित कार्य प्रणालियां उपलब्ध कराने की है. सीएसआइआर-एनएमएल, सी-मैट एवं सिपेट जैसे संस्थानों की तकनीकी विशेषज्ञता को मास्टर ट्रेनर्स एवं एक्सेलेरेटर्स के माध्यम से अनौपचारिक क्षेत्र से जोड़कर एक अधिक संगठित एवं सतत ई-वेस्ट पुनर्चक्रण प्रणाली विकसित की जा सकती है. (नीचे भी पढ़ें)
कार्यक्रम के अंतिम दिन प्रतिभागियों का मूल्यांकन पूरे सप्ताह के प्रशिक्षण पर आधारित परीक्षा के माध्यम से किया गया. इसके पश्चात परियोजना प्रमुख सह मुख्य वैज्ञानिक डॉ मनीष कुमार झा एवं डॉ अंकुर शर्मा के साथ एक संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने अनुभव, शंकाओं एवं भविष्य की भूमिका पर चर्चा की. सफल प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र भी वितरित किए गए. विश्व पर्यावरण दिवस पर इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसके उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास एवं संसाधन संरक्षण से सीधे जुड़े हुए हैं. (नीचे भी पढ़ें)
पर्यावरण दिवस पर हुआ पौधा रोपण
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर तथा प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल समापन के उपलक्ष्य में सीएसआइआर-एनएमएल परिसर में पौधा रोपण कार्यक्रम भी आयोजित हुआ. इस अवसर पर टेरी एवं रीकार्ट से जुड़े 12 मास्टर ट्रेनर्स ने आम के पौधे लगाए. यह गतिविधि सतत विकास, जैव विविधता संरक्षण एवं पर्यावरण सुरक्षा के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक रही. पौधा रोपण के माध्यम से प्रतिभागियों ने यह संदेश दिया कि जिम्मेदार पुनर्चक्रण, संसाधन संरक्षण तथा हरित पर्यावरण—तीनों एक सतत एवं सुरक्षित भविष्य के लिए समान रूप से आवश्यक हैं.







