जमशेदपुर : जमशेदपुर के साकची थाना क्षेत्र में शनिवार को लावारिस हालत में मिले शव की पहचान रविवार को हरहरगुट्टू निवासी 55 वर्षीय संताराम हलुआ के रूप में हुई. संताराम 10 जुलाई की देर रात एमजीएम अस्पताल से शौचालय जाने की बात कहकर वार्ड से निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे. शनिवार को उनका शव साकची स्थित टाटा स्टील के गेट के पास बरामद हुआ. पोस्टमार्टम के बाद सोमवार को शव परिजनों को सौंपा जाएगा. जानकारी के अनुसार, संताराम 6 जुलाई से कमजोरी समेत अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज के लिए एमजीएम अस्पताल के चौथे तल्ले पर बेड संख्या 414 पर भर्ती थे. शुक्रवार रात करीब 12:30 बजे वह वार्ड से बाहर निकले. रात तीन बजे तक वापस नहीं लौटने पर उनकी पत्नी ने तलाश शुरू की और शनिवार सुबह बेटे पूरण लाल को सूचना दी. सीसीटीवी फुटेज की जांच में पता चला कि संताराम अस्पताल के पिछले गेट से बाहर चले गए थे, जिसके कुछ घंटे बाद उनका शव कंपनी गेट के पास मिला. (नीचे भी पढ़ें)
घटना के बाद मृतक के बेटे ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए होमगार्ड डीएसपी हरिहर सिंह मुंडा से शिकायत की. होमगार्ड प्रभारी दिग्विजय पांडेय ने बताया कि अस्पताल में कुल 13 प्रवेश-निकास द्वार हैं, लेकिन सुरक्षा कर्मी केवल तीन गेटों पर ही तैनात रहते हैं. आशंका है कि संताराम बेसमेंट वाले गेट से बाहर निकल गए, जिसकी किसी को भनक नहीं लगी. यह पहली घटना नहीं है. इससे पहले 15 मार्च को बागबेड़ा निवासी मरीज सुनील कुमार यादव भी अस्पताल से लापता हो गए थे और 23 मार्च को उनका शव अस्पताल परिसर से बरामद हुआ था. (नीचे भी पढ़ें)
उस मामले की जांच समिति ने मरीजों के लिए ड्रेस कोड लागू करने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की सिफारिश की थी, लेकिन अब तक उस पर अमल नहीं हो सका. इधर, शुक्रवार देर रात ही परसुडीह निवासी 38 वर्षीय सुनील साहू भी वार्ड से लापता हो गए थे, जिन्हें सुरक्षाकर्मियों ने अस्पताल के बेसमेंट से खोजकर सुरक्षित वापस वार्ड पहुंचा दिया. सूत्रों के अनुसार, अस्पताल से लापता होने वाले कई मरीज नशे की लत या मानसिक अस्वस्थता के कारण अचानक वार्ड छोड़ देते हैं. लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने एमजीएम अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और मरीजों की निगरानी प्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए.





