जमशेदपुर : जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने इस बात पर गहरी चिंता जताई है, जिसमें मानगो नगर निगम के अधिकारियों द्वारा नगर निगम चुनाव के पहले प्रकाशित किये गए करीब डेढ़ दर्जन से अधिक निविदाओं को बिना कारण बताए रद कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि नगर निगम का यह निर्णय पीडब्ल्यूडी कोड (लोक निर्माण संहिता) के प्रासंगिक प्रावधानों के विपरीत है. इसके लिए उन्होंने जिम्मेदार प्राधिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है. (नीचे भी पढ़ें)
अपने बयान में सरयू राय ने कहा है कि पीडब्ल्यूडी कोड को निविदा निष्पादन के मामले में बाइबिल, गीता, कुरान जैसा दर्जा प्राप्त है. निविदा किसी भी विभाग की हो या नगर निकाय की हो, सभी का निष्पादन पीडब्ल्यूडी कोड के अनुसार ही होता है. पीडब्ल्यूडी कोड के अनुसार, कार्य दर के मामले में सबसे कम यानी एल-1 आने वाले निविदा दाता की निविदा विभाग द्वारा चयनित की जाती है. चयनित निविदा दाता को एलओओ (लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस) जारी किया जाता है, जिसकी अवधि 21 दिनों की होती है. यदि निविदा दाता 21 दिनों के भीतर कार्य करने की सहमति नहीं देता है अर्थात एकरारनामा नहीं करता है तो उसे दो बार रिमाइंडर दिया जाता है. पहला रिमाइंडर 15 दिनों के भीतर एकरारनामा करने के लिए और दूसरा एक सप्ताह के भीतर एकरारनामा करने के लिए. यदि तब भी चयनित निविदादाता एकरारनामा नहीं करता है तो उसकी अग्रिम धनराशि जब्त कर ली जाती है और कार्य दर के मामले में दूसरे स्थान (एल-2) पर आने वाले निविदा दाता से दर वार्ता की जाती है. (नीचे भी पढ़ें)
श्री राय ने कहा कि यदि वह एल-1 के कार्य दर पर कार्य करने के लिए तैयार है तो उसका चयन सफल निविदादाता के रुप में कर लिया जाता है अन्यथा निविदा रद करने की प्रक्रिया आरंभ की जाती है. उन्होंने कहा कि मानगो नगर निगम ने निविदाओं को रद करने के मामले में इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया है. इतना ही नहीं, जिन निविदा दाताओं ने एकरारनामा कर लिया है, जिन्होंने अग्रधन राशि जमा कर दिया है, उन निविदा दाताओं की निविदाएं भी रद कर दी गई हैं. श्री राय के अनुसार, सूचना मिल रही है कि ऐसी निविदाएं, जिनकी तकनीकी अथवा प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त नहीं हुई है और जो निष्पादन की प्रक्रिया में हैं, उन निविदाओं को भी नगर निगम ने या तो रद कर दिया है या रद करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है. सरयू राय ने कहा कि किसी भी वरिष्ठ लोकसेवक के लिए ऐसा निर्णय लेना आश्चर्यजनक है. इससे उसकी कार्यदक्षता एवं निपुणता पर सवालिया निशान खड़ा होता है. ऐसा तभी संभव है, जब लोकसेवक का या तो निविदा निष्पादन में निहित स्वार्थ हो अथवा वह दबाव में ऐसा करने के लिए विवश हुआ हो. दोनों ही स्थिति में ऐसे लोकसेवक के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की जानी चाहिए. श्री राय ने कहा कि निविदा निष्पादन प्रक्रिया में पीडब्ल्यूडी कोड के प्रावधानों का पालन नहीं करना अथवा उल्लंघन करना घोर अपराध की श्रेणी में रखा जाता है. यह विषय वह विधानसभा के आगामी सत्र में उठाएंगे और सरकार का ध्यान वरिष्ठ लोकसेवकों के ऐसे निहित स्वार्थी आचरण की ओर आकर्षित करते हुए उनके विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई करने की मांग सरकार से करेंगे.




