जमशेदपुर : टाटा स्टील के एक स्थायी कर्मचारी को अप्राकृतिक यौन शोषण को लेकर नौकरी से बरखास्त कर दिया गया है. कंपनी के लाइम प्लांट के इंटीग्रेटेड इलेक्ट्रिकल मेंटेनेंस विभाग के उक्त कर्मचारी पर आरोप है कि उसने ठेका कर्मचारी 20 वर्षीय युवक का अप्राकृतिक यौन उत्पीड़न किया. इसके बाद उक्त आरोप में उसकी जांच करायी गयी. जांच के बाद उस पर लगाये गये सारे आरोप को सही पाया गया, जिसके बाद उसको सजा सुनायी गयी. बताया जाता है कि उक्त कर्मचारी टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव चौधरी टुन्नु के विभाग से ही है. लिहाजा, उनको बचाने का काफी दबाव था, लेकिन चूंकि, आरोपी कर्मचारी ने खुद अपने स्वीकारोक्ति बयान में अपने अपराध को स्वीकार कर लिया था. इस कारण उसको बरखास्त कर दिया गया. हालांकि, उक्त कर्मचारी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को झूठा व बेबुनियाद बताते हुए कुछ सहकर्मियों पर जबरन फंसाने का आरोप लगाया है. कर्मचारी के अनुसार, नौ मार्च को उनके सेक्शन में कार्यरत 20 वर्षीय ठेका कर्मचारी बी शिफ्ट में बिना आउट पंच किए चला गया था. शिफ्ट इंचार्ज होने के नाते अगले दिन उससे सवाल किया, जिसके बाद विवाद हो गया. (नीचे भी पढ़ें)
दावा है कि विवाद का बदला लेने को उनके खिलाफ अनैतिक कार्य का आरोप लगाकर शिकायत की गई. आरोप लगाया कि विवाद के उनके साथ मारपीट का प्रयास भी किया गया और बाद में उनके खिलाफ ही लिखित शिकायत कर दी गई. बताया कि जांच के दौरान कंपनी प्रबंधन की और से उन पर शिकायत स्वीकार करने का दबाव बनाया गया. उन्होंने घटना स्थल के सीसीटीवी फुटेज की उक्त कर्मचारी ने आरोपों को झूठा बताया. उन्होंने सीसीटीवी की जांच कराने का आग्रह किया, लेकिन उनके अनुसार इस पर ध्यान नहीं दिया गया. शिकायत की समय-सीमा पर भी उन्होंने सवाल उठाया. उनका कहना है कि घटना सोमवार की बी शिफ्ट की थी, लेकिन मंगलवार को शिकायत नहीं की गई और बुधवार को जनरल शिफ्ट में शिकायत दर्ज कराई गई. बताया कि आठ जुलाई को उन्हें आंतरिक प्रमोशन में एनएस 9 से एनएस 10 में पदोन्नति मिली थी, लेकिन गलत प्रमोशन की शिकायत के बाद इसे रोक दिया गया. इसकी जानकारी उन्होंने टाटा वर्कर्स यूनियन अध्यक्ष संजीव चौधरी सहित संबंधित अधिकारियों को दी थी. उन्होंने 2011 में एनएस 7 ग्रेड में इंजीनियर 1 के पद पर टाटा स्टील ज्वाइन किया था.




