जादूगोड़ा : यूसिल अनुसूचित जनजाति कर्मचारी संघ के आग्रह पर दो दिवसीय दौरे के पश्चात जादूगोड़ा से वापस दिल्ली लौटी राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति की सदस्या डॉ आशा लकड़ा से पहली मुलाकात से यूसिल की टेलिंग पौंड से सटे गांव चाटीकोचा गांव के 26 विस्थापित परिवारों को उम्मीदें जागी है. तीसरे टेलिंग पौंड से निकलने वाली यूरेनियम विकिरण के कथित प्रभाव से अब उन्हें मुक्ति मिलेगी. वही बीते 30 सालों यानि 1997 से कोषागार में जमा उचित पुनर्वास राशि का भुगतान संभव हो पाएगा. इस मौके पर जादूगोड़ा के भाटीन पंचायत अंतर्गत चाटीकोचा के ग्रामीणों ने पांच सूत्री मांग पत्र में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्या डॉ आशा उरांव को सौंपी है. डॉ आशा उरांव को सौंपे मांग पत्र में कहा गया हैं कि 1997 से पूर्व जन्मे चाटीकोचा के सभी विस्थापितों को नियोजन, विस्थापितों के मृत्यु होने पर या कंपनी से सेवानिवृत्त होने पर 30 दिनों के अंदर योग्य आश्रितों को नौकरी, तीसरे टेलिंग पौंड को लेकर विस्थापितों को हो रही परेशानी से राहत के लिए पुनर्वास की मांगे शामिल है. अपने दौरे के क्रम में डॉ आशा लकड़ा ने चाटीकोचा के ग्रामीणों से भी रूबरू हुई व उनका हाल- चाल जाना. यूसिल की श्रमिक संगठन यूरेनियम कामगार यूनियन महामंत्री भरत किस्कू कहते हैं कि एक ही कंपनी में यूसिल में दो तरह के कानून है. (नीचे भी पढ़ें)
वे अनुसूचित जनजाति कर्मचारियों की सुविधाओं में भेद-भाव का भी आरोप लगाया तथा कहा कि यूसिल की जनजातीय समुदाय के कर्मचारियों को सेवानिवृत के बाद कंपनी अस्पताल तक ही मेडिकल सुविधा मिलती है, जबकि कंपनी अधिकारी एक सेवानिवृत्त के पश्चात उन्हें साल में 20 लाख रुपया मेडिकल का खर्च कंपनी प्रबंधन उठाती है. ड्यूटी के दौरान कर्मचारी के मौत होने पर कंपनी की ग्रुप बीमा से मृतक परिवार को मात्र पांच सात लाख रुपया ही मिलता है, जिससे मृतक परिवार का गुजारा नहीं होता है. इसे लेकर डॉ आशा लकड़ा को अवगत कराया गया है. यूसिल कर्मचारियों की सुस्त प्रमोशन, पॉलिसी, विस्थापित आदिवासियों के मृतक के आश्रितों को नौकरी, पीढ़ी दर पीढ़ी नियोजन की भी मांगो से राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य डॉ आशा लकड़ा को अगवत कराया गया है. उनके दौरे से उत्साहित यूसिल अनुसूचित जनजाति कर्मचारी संघ ने भी अपनी विभिन्न समस्याओ को डॉ आशा लकड़ा के समक्ष रखा है, जहां समाधान करने का दिशा निर्देश यूसिल प्रबंधन को दी गई है. कंपनी प्रबंधन को आशा लकड़ा ने कहा है कि कंपनी प्रबंधन प्रत्येक तीन महीने में एक समीक्षा बैठक यूसिल अनुसूचित जनजाति कर्मचारी संघ के साथ तय करे ताकि विवाद को सुलझाया जा सके. (नीचे भी पढ़ें)
बहरहाल, देखना यह है कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के दौरे से आदिवासी अपने को ठगा महसुस करते है या उनके हित में यूसिल बेहतर कदम उठाती है. इस बैठक में यूसिल के अध्यक्ष सह प्रबंध निर्देशक डॉ कंचम आनंद राव, उप महाप्रबंधक (कार्मिक) राकेश कुमार, तुरामडीह माइंस के प्रबंधक(कार्मिक) संजीव रंजन, तकनीकी निर्देशक विक्रम केसरी दास, महाप्रबंधक मनोज कुमार, कार्यकारी निर्देशक एम के सिंघई वही यूसिल अनुसूचित जनजाति कर्मचारी संघ के अध्यक्ष मनोरंजन महाली, महासचिव दीपतेन्दु हांसदा, कार्यकारी महासचिव श्रीजन टुडू, कार्यकारी महासचिव दामू नाईक, कार्यकारी महासचिव हीरा टुडू, बगजाता माइंस के सह सचिव शांखो मुर्मू, जादुगोड़ा मिल के सह सचिव सुरजीत कुमार सोरेन, तुरामडीह माइंस के सहसचिव सुनील दिग्गी, तुरामडीह मिल के सह सचिव मानिक चांद मुर्मू, महुलडीह माइंस के सह सचिव लखन टुडू, लखन मार्डी, मंगल टुडू, तुलसी सुंडी, साहेब हांसदा, रिंचू माझी, नारायण मुर्मू, गाजिया हांसदा, बिरेन टुडू, रामी मुर्मू, कारा मुर्मू, भरत लाल किस्कू, चाटीकोचा के ग्राम प्रधान मेघराई सोरेन, सालूका हेंब्रम, पिथो माझी, अर्जुन हेंब्रम एवं अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे.




