जमशेदपुर : जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में सोमवार रात एक बार फिर आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खुल गई. सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल आदिम जनजाति समुदाय के एक युवक को इलाज के लिए अस्पताल लाया गया, लेकिन इमरजेंसी में तत्काल चिकित्सकीय सहायता नहीं मिलने के कारण उसे 20 मिनट से अधिक समय तक कार में ही रहना पड़ा. घायल के परिजन डॉक्टरों की तलाश में इमरजेंसी काउंटर से लेकर ड्रेसिंग रूम तक भटकते रहे. बाद में अस्पताल प्रबंधन को सूचना मिलने पर वरीय चिकित्सक पहुंचे और घायल का इलाज शुरू किया. जानकारी के अनुसार, बिरसानगर थाना क्षेत्र के हुरलुंग गांव में सोमवार रात करीब नौ बजे दो बाइकों के बीच जोरदार टक्कर हो गई. हादसे में एक बाइक पर सवार लुपुंगडीह निवासी राहुल सबर (24) गंभीर रूप से घायल हो गया. (नीचे देखे पूरी खबर)

उसके सिर में गंभीर चोट लगी थी. वहीं, दूसरी बाइक पर सवार दोनों युवक दुर्घटना के बाद मौके से फरार हो गए. स्थानीय लोगों की मदद से घायल राहुल को पहले एक स्थानीय चिकित्सक के पास ले जाया गया, जहां उसका प्राथमिक उपचार कराया गया. इसके बाद परिजन उसे कार से लेकर एमजीएम अस्पताल पहुंचे. रात करीब साढ़े 10 बजे अस्पताल पहुंचने के बावजूद राहुल को तत्काल इमरजेंसी में भर्ती नहीं कराया जा सका. वह 20 मिनट से अधिक समय तक कार में ही पड़ा रहा. परिजन मदद के लिए इमरजेंसी काउंटर, डॉक्टरों के बैठने की जगह और ड्रेसिंग रूम तक चक्कर लगाते रहे, लेकिन उन्हें तत्काल चिकित्सकीय सहायता नहीं मिल सकी. बताया गया कि उस समय इमरजेंसी में दो जूनियर डॉक्टर मौजूद थे, जो अन्य मरीजों के इलाज में व्यस्त थे. (नीचे देखे पूरी खबर)
इस कारण घायल राहुल को तत्काल चिकित्सकीय सहायता मिलने में देरी हुई. इसी दौरान चांडिल निवासी आदिम जनजाति समुदाय के एक प्रमुख व्यक्ति को मामले की जानकारी मिली. उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को घटना से अवगत कराया. इसके बाद करीब 11 बजे एक वरीय चिकित्सक इमरजेंसी पहुंचे और सिर में गंभीर चोट लगे राहुल का इलाज शुरू किया. घायल राहुल की बड़ी बहन आदूरी सबर ने अस्पताल की रात की व्यवस्था पर नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि गंभीर हालत में मरीज को अस्पताल लाने के बावजूद समय पर चिकित्सकीय सहायता नहीं मिलना बेहद चिंताजनक है. परिजन मरीज को लेकर अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन मदद के लिए काफी देर तक इधर-उधर भटकना पड़ा. इस घटना ने एमजीएम अस्पताल की रात की आपातकालीन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. गंभीर मरीजों के लिए तत्काल चिकित्सकीय सहायता, इमरजेंसी में पर्याप्त डॉक्टरों की उपलब्धता और समय पर मरीजों को स्ट्रेचर या बेड मुहैया कराने की व्यवस्था को लेकर एक बार फिर अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं.



