जमशेदपुर : टाटा स्टील यूआइएसएल ने सतत अपशिष्ट जल प्रबंधन को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सोनारी के मैरिन ड्राइव स्थित खरकई एन्क्लेव के निकट स्थित 500 केएलडी पैकेज्ड सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का उदघाटन किया गया. इस सुविधा का उद्घाटन टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट डीबी सुंदर रामम ने किया. इस अवसर पर टाटा स्टील यूआइएसएल के एमडी अतुल कुमार भटनागर, सीनियर जीएम स्वास्थ्य, सुरक्षा व पर्यावरण वीपी सिंह, जीएम जल व अपशिष्ट जल सेवाएं संजीव कुमार झा तथा टाटा स्टील यूटिलिटी सर्विसेज श्रमिक यूनियन के अध्यक्ष रघुनाथ पांडेय सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे. इस एसटीपी में उन्नत अपशिष्ट जल उपचार तकनीक को अपनाया है. यह नवीन तकनीक इलेक्ट्रो ऑक्सीडेशन–इलेक्ट्रो कोएगुलेशन सिद्धांत पर आधारित है और इसे मेसर्स इंफ्लॉक्स वाटर सिस्टम ने विकसित किया है. पारंपरिक जैविक उपचार प्रणालियों के प्रभावी विकल्प के रूप में यह तकनीक संचालन एवं पर्यावरण, दोनों दृष्टिकोणों से कई लाभ प्रदान करती है. इस उपचार प्रणाली में कम स्थान की आवश्यकता होती है तथा इसका डिजाइन मॉड्यूलर और स्केलेबल है, जिससे भविष्य में आवश्यकता के अनुरूप इसकी क्षमता बढ़ाने में अधिक लचीलापन मिलता है. (नीचे भी पढ़े)

यह प्रणाली पारंपरिक उपचार प्रक्रियाओं की तुलना में कम ऊर्जा की खपत करती है तथा कम मात्रा में स्लज और दुर्गंध उत्पन्न करती है, जिससे उपचार प्रक्रिया के पर्यावरणीय एवं परिचालन प्रभाव को कम करने में सहायता मिलती है. इस प्रणाली की एक प्रमुख विशेषता इसका पोर्टेबल रिएक्टर है, जिसमें प्लग-इन एवं प्लग-आउट सुविधा उपलब्ध है. इसके माध्यम से प्लांट को आवश्यकता के अनुसार तुरंत शुरू या बंद किया जा सकता है. प्लांट के बंद रहने की अवधि में बायोमास कल्चर को बनाए रखने की आवश्यकता नहीं होती, जिससे संचालन में अधिक लचीलापन और सुविधा मिलती है. इस तकनीक को अपनाना टाटा स्टील यूआइएसएल की नवाचार, पर्यावरणीय स्थिरता और जिम्मेदार जल प्रबंधन के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है. यह पहल शहरी अपशिष्ट जल उपचार की दक्षता बढ़ाने के लिए आधुनिक एवं टिकाऊ समाधानों को अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है.




