जमशेदपुर : ओडिशा के भुवनेश्वर स्थित द क्राउन में “फ्राम इंडस्ट्रियल रिलेशंस टू इंटीलिजेंट रिलेशंस, बैलेंसिंग इमोशन व लॉजिक” विषय पर एक विचारोत्तेजक फायरसाइड चैट का आयोजन किया गया. यह कार्यक्रम 14वें अवनीश देव मेमोरियल लेक्चर का हिस्सा था, जिसका आयोजन मारुति सूजकी एक्सआिएसएस, अवनिश कुमार देव मेमोरियल ट्रस्ट के तत्वावधान में किया गया. फायरसाइड चैट में उद्योग, मानव संसाधन, औद्योगिक संबंध, श्रमिक नेतृत्व और प्रबंधन शिक्षा से जुड़े कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों ने भाग लिया. चर्चा का उद्देश्य बदलते औद्योगिक संबंधों, तकनीकी परिवर्तन और कार्यस्थल पर मानवीय संवेदनाओं एवं व्यावसायिक तर्क के बीच संतुलन पर विचार-विमर्श करना था. कार्यक्रम का संचालन सिम्पली ग्रुप के सीइओ रजनीश सिंह ने किया. पैनल में दत्तोपंत ठेंगड़ी नेशनल बोर्ड ऑफ वर्कर्स एजुकेशन एंड डेवलपमेंट के गवर्निंग बॉडी के चेयरपर्सन ब्रजेश उपाध्याय तथा टाटा वर्कर्स यूनियन के उपाध्यक्ष और जेसीएपीसीपीएल यूनियन के वर्किंग प्रेसिडेंट डॉ. शाहनवाज़ आलम शामिल रहे. (नीचे भी पढ़ें)

कार्यक्रम में उद्योग एवं एचआर क्षेत्र के अनेक वरिष्ठ व्यक्तित्व उपस्थित रहे, जिनमें टाटा संस के पूर्व सीएचआरओ डॉ. एनएस राजन, एयर इंडिया के पूर्व सीएचआरओ सुरेश दत्त त्रिपाठी, टाटा स्टील के पूर्व टाउन जीएम राजीव दुबे, होंडा के पूर्व सीएचआरओ हरभजन सिंह, मारुति के एमडी सह सीइओ टेकेउचि, आइबीएम के पूर्व सीएचआरओ अकिल बुशरा, झारखंड के आइएएस मनीष कुमार और मारुति सुजुकी के सीएचआरओ सलिल लाल प्रमुख थे. इस अवसर पर एक्सआइएसएस, एक्सआइएमबी, एक्सएलआरआइ व किट सहित विभिन्न प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थानों के विद्यार्थी भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे. इससे चर्चा में उद्योग के अनुभवी नेतृत्व और भविष्य के प्रबंधन पेशेवरों के बीच एक सार्थक संवाद स्थापित हुआ. चर्चा के दौरान डॉ. शाहनवाज़ आलम ने ट्रेड यूनियन एवं औद्योगिक संबंधों के अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि भविष्य के कार्यस्थल में तकनीक के साथ विश्वास, उत्पादकता के साथ गरिमा तथा तर्क के साथ संवेदनशीलता का संतुलन आवश्यक होगा. उन्होंने कहा कि औद्योगिक संबंध अब केवल विवादों के समाधान तक सीमित नहीं रह सकते. बदलते समय में आवश्यकता ऐसे “इंटीलिजेंट रिलेशंस” की है, जिसमें प्रबंधन और कर्मचारी मिलकर व्यावसायिक चुनौतियों, तकनीकी बदलाव और कर्मचारियों की बदलती अपेक्षाओं को समझें. (नीचे भी पढ़ें)

इस मौके पर टाटा वर्कर्स यूनियन के उपाध्यक्ष शहनवाज आलम ने कहा कि औद्योगिक संबंधों का भविष्य भावनाओं और तर्क में से किसी एक को चुनने में नहीं है. भविष्य इस बात में है कि समाधान खोजने के लिए तर्क का इस्तेमाल हो, लेकिन हर निर्णय के केंद्र में इंसान बना रहे. चर्चा में एआइ, डिजिटलाइजेशन, बदलती कार्यप्रणाली, नए कौशल, रोजगार के बदलते स्वरूप और भविष्य के कार्यस्थल जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ. पैनलिस्टों ने निरंतर सीखने, पारदर्शी संवाद, विश्वास निर्माण और कर्मचारियों को परिवर्तन के लिए तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया. कार्यक्रम का विषय “बियोंड प्रोडक्टिविटी : दी ह्यूमन परपज ऑफ वर्क” था, जो 14वें अवनीश देव मेमोरियल लेक्चर के अंतर्गत आयोजित किया गया. यह व्याख्यान अवनीश कुमार देव (1962–2012) की स्मृति को समर्पित है. डॉ. शाहनवाज़ आलम ने इस प्रतिष्ठित मंच पर ट्रेड यूनियन के दृष्टिकोण से औद्योगिक संबंधों के भविष्य पर विचार साझा करने का अवसर प्रदान करने के लिए आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया.




