जमशेदपुर : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मंगलवार को जमशेदपुर परिसदन में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी के नेतृत्व में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों पर तीखा हमला बोला. पत्रकार वार्ता में उनके साथ भाजपा जिला अध्यक्ष संजीव सिन्हा और प्रवक्ता प्रेम झा मौजूद थे. बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सत्ता से बाहर होने के बाद कांग्रेस देश में अराजकता का माहौल पैदा करने, संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने और लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास कर रही है. उन्होंने इन गतिविधियों के पीछे विदेशी शक्तियों के प्रभाव की आशंका जताते हुए कहा कि देश की जनता को ऐसी ताकतों को पहचानने की जरूरत है. बाबूलाल मरांडी ने कहा कि आज भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकास और प्रगति के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है. सड़क, रेल एवं हवाई कनेक्टिविटी, डिजिटल इंडिया, स्वास्थ्य, आवास, रक्षा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में देश ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं. आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से गरीबों को स्वास्थ्य सुरक्षा, प्रधानमंत्री आवास योजना के जरिए जरूरतमंदों को घर तथा रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा मिला है. उन्होंने दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में देश की विकास यात्रा ने भारत की वैश्विक पहचान को मजबूत किया है, लेकिन कांग्रेस और विपक्षी दल इस प्रगति को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं. बाबूलाल मरांडी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अनुच्छेद 370 को समाप्त करने, अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर के निर्माण और मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक की कुप्रथा से कानूनी संरक्षण देने जैसे महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं. आतंकवाद के विरुद्ध सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से भारत ने अपनी सुरक्षा क्षमता और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया है. इन उपलब्धियों ने दुनिया के सामने भारत की सामर्थ्य को स्थापित किया है. (नीचे देखे पूरी खबर)
कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि कांग्रेस कभी ईवीएम, कभी वोट चोरी और कभी एसआईआर के मुद्दे पर आंदोलन कर रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल उठाकर उनकी विश्वसनीयता को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की मांग और हाल के दिनों में न्यायपालिका से जुड़े घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतंत्र में किसी संस्था के फैसले से असहमति होने पर संवैधानिक और कानूनी रास्ता अपनाना चाहिए, न कि संस्थाओं के प्रति अविश्वास का माहौल बनाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि किसी को न्यायालय के फैसले से शिकायत है, तो उसके लिए कानूनी प्रक्रिया उपलब्ध है. कांग्रेस और उसके सहयोगी दल अलग-अलग मुद्दों के माध्यम से देश में अस्थिरता का माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं. (नीचे देखे पूरी खबर)

नवरात्र के दौरान प्रदर्शन की टाइमिंग पर उठाए सवाल
बाबूलाल मरांडी ने नवरात्र के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में हो रहे धरना-प्रदर्शनों पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि नवरात्र भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है. इन नौ दिनों में श्रद्धालु मां दुर्गा की आराधना करते हैं और परिवार एवं समाज के साथ उत्सव मनाते हैं. भारत विविधताओं वाला देश है, जहां सभी धर्मों और समुदायों के पर्वों का सम्मान किया जाता है. उन्होंने कहा कि सामान्यतः बड़े त्योहारों के दौरान राजनीतिक दल भी इस बात का ध्यान रखते हैं कि लोगों के उत्सव और धार्मिक आयोजनों में व्यवधान न हो. ऐसे समय में लगातार विरोध-प्रदर्शन आयोजित किए जाने की टाइमिंग पर सवाल उठना स्वाभाविक है. उन्होंने आरोप लगाया कि इसके जरिए सनातन संस्कृति और लोगों की धार्मिक आस्था को आहत करने का प्रयास किया जा रहा है. (नीचे देखे पूरी खबर)

विपक्षी राजनीति पर साधा निशाना, चुनावी पराजयों का किया उल्लेख
पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने कहा कि कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति आज की नहीं, बल्कि कई दशकों से लगातार कमजोर होती रही है. उन्होंने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, बिहार, उत्तर प्रदेश, गुजरात और ओडिशा का उल्लेख करते हुए कहा कि इन राज्यों में कांग्रेस को अलग-अलग समय पर जनता के विरोध और राजनीतिक पराजय का सामना करना पड़ा है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब नरेंद्र मोदी वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बने भी नहीं थे, तब से कांग्रेस कई राज्यों में अपनी राजनीतिक जमीन खो रही थी. ऐसे में अपनी पराजयों का ठीकरा ईवीएम या चुनाव प्रक्रिया पर फोड़ना उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का विश्वास और जनसमर्थन ही सबसे महत्वपूर्ण होता है. राजनीतिक दलों को अपनी कमियों का आकलन करना चाहिए, न कि बार-बार चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाकर जनता के फैसले को कटघरे में खड़ा करना चाहिए. (नीचे देखे पूरी खबर)
वामपंथी उग्रवाद का जिक्र कर ‘दिमागी नक्सल’ पर जताई चिंता
बाबूलाल मरांडी ने झारखंड में माओवादी उग्रवाद के दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य ने वह समय भी देखा है, जब उग्रवादी चुनाव बहिष्कार की घोषणा करते थे और मतदाताओं को वोट डालने से रोकने के लिए धमकियां दी जाती थीं. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को कमजोर करने वाली किसी भी विचारधारा या गतिविधि का विरोध आवश्यक है. उन्होंने मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को वैचारिक स्तर पर लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चुनौती बताते हुए लोगों से जागरूक और एकजुट रहने की अपील की. उन्होंने नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों की राजनीतिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की स्थिर लोकतांत्रिक व्यवस्था और विकास की गति को बनाए रखना जरूरी है. उनके अनुसार, देश की एकता, लोकतंत्र और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए नागरिकों को सजग रहना होगा. (नीचे देखे पूरी खबर)

झारखंड की कानून-व्यवस्था पर राज्य सरकार को घेरा
पत्रकारों से बातचीत के दौरान बाबूलाल मरांडी ने झारखंड में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर भी राज्य सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय सरकार की नीतियों और कार्यशैली से स्थिति बिगड़ रही है. उन्होंने कहा कि राज्य में आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है. सरकार को अपराध पर नियंत्रण, कानून का प्रभावी पालन और लोगों में सुरक्षा का विश्वास कायम करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए. बाबूलाल मरांडी ने कहा कि देश और राज्य के सामने मौजूद चुनौतियों का समाधान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक मर्यादाओं और जनहित को प्राथमिकता देने से होगा. उन्होंने लोगों से देश की एकता, अखंडता, लोकतांत्रिक संस्थाओं और भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए सजग रहने का आह्वान किया.





