
जमशेदपुर : झारखंड राज्य सहकारी बैंक कर्मचारी संघ के कार्यकारी अध्यक्ष चंदन कुमार प्रसाद ने बैंक के अध्यक्ष रह चुके विजय सिंह पर हमला बोला है. उन्होंने हाल के दिनों में मीडिया में छपी खबरों को लेकर हमलावर अंदाज में बयान दिया है और कहा है कि गलत तरीके से बैंक को बदनाम करने की साजिश विजय सिंह कर रहे है. चंदन कुमार प्रसाद ने कहा है कि गैर निबंधित संस्था सहकारिता अध्ययन मंडल जमशेदपुर के अध्यक्ष विजय कुमार सिंह द्वारा बीते कई वर्षों से बैंक के खिलाफ ना सिर्फ अनर्गल एवं भ्रामक दुष्प्रचार किया जा रहा है बल्कि मीडिया में गलत बयान दिया जा रहा है, इससे बैंक की साख प्रभावित हो रही है. उन्होंने बताया है कि विजय कुमार सिंह को बीते वर्ष निदेशक मंडल के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था. बाद में बोर्ड पर को-ऑप्शन करने का दबाव बनाया गया. जब बोर्ड ने इसे प्रस्ताव में नहीं लिया तो इन्होने बोर्ड के सदस्यों और बैंक के वरीय पदाधिकारियों के खिलाफ अनर्गल शिकायत मीडिया में देना शुरू किया ताकि वरीय पदाधिकारी भयाक्रांत होकर उन्हें निदेशक मंडल में मनोनीत कर ले. वर्तमान में बैंक के ग्राहक एवं को-ऑपरेटिव सोसाइटी तथा अन्य बड़े जमाकर्ता बैंक की शाखा में आकर बैंक के डूबने संबंधित आशंकाएं जता रहे हैं, नि:संदेह इससे बैंक की साख प्रभावित हो रही है. इस परिप्रेक्ष्य में झारखण्ड राज्य सरकारी बैंक कर्मचारी संघ ने मांग की है कि विजय कुमार सिंह तथा विभिन्न एकपक्षीय खबर छपने वाले अखबार-उदितवाणी, सन्मार्ग, न्यू इस्पात मेल एंव ऑनलाइन समाचार शार्प-भारत के खिलाफ मान-हानि का मुकदमा दर्ज कराया जाए, जमशेदपुर में सभी सहकारी समितियों एवं बड़े निवेशकों की बैठक कराकर बैंक की वस्तुस्थिति स्पष्ट किया जाए, मीडिया में छपी खबरों का खंडन प्रकाशित कराया जाए एवं कानूनी कार्रवाई की जाए. उपरोक्त तीन सूत्री मांगों पर शीध्र कार्रवाई की जाए अन्यथा बाध्य होकर यूनियन आंदोलन करेगी. दूसरी ओर, झारखंड राज्य सहकारी बैंक कर्मचारी संघ के कार्यकारी अध्यक्ष ने एक प्रेस रिलीज जारी कर कहा है कि झारखंड सहकारी बैंक पहला बैंक है, जिसमें सात जिला सहकारी बैंक को मिलाकर एक राज्यस्तरीय सहकारी बैंक बनाया गया है. भारतीय रिजर्व बैंक के स्वीकृति और निबंधक, सहयोग समितियां, झारखंड, रांची के अधिसूचना के पश्चात दिनांक 1 अप्रैल 2017 से यह बैंक राज्यस्तरीय सहकारी बैंक के रुप में कार्य करना प्रारंभ किया. राज्य सरकार के अधीनस्थ यह बैंक पूरे राज्य में कार्यरत है, इसके अंतर्गत तीन क्षेत्रीय कार्यालय यथा हजारीबाग, चाईबासा और दुमका के अधीन कुल 105 शाखाएं कार्यरत है, जिसके तहत 4383 लैंपस/पैक्स के माध्यम से सुदूरवर्ती क्षेत्र के लोगों को बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध करा रही है. यह बैंक पूर्ण रुप से सीबीएस सिस्टम के तहत कार्य कर रही है और सभी बैंकिंग सेवाएं यथा आरटीजीएस/एनइएफटी, एइपीएस, इसीएमएस, एमएमएस एटीएम रुपये डेबिट कार्ड, डीबीटी, पीएमएसबीवाई और पीएमजेजेबीवाइ इत्यादि की सुविधा अपने ग्राहकों को उपलब्ध करा रही है. झारखंड राज्य सहकारी बैंक अपने तीन हजार बैंकिंग मित्रों के माध्यम से बैंकिंग सुविधाएं आपके दरवाजे पर उपलब्ध करा रही है. बैंक में कुल 31 एटीएम कार्यरत है और राज्य के अन्य क्षेत्रों में भी एटीएम का विस्तार किया जा रहा है. झारखंड राज्य सहकारी बैंक डीबीटी व पीओएसके माध्यम से छात्रवृति, वृद्धा पेंशन इत्यादि सीधे खाताधारकों के खाता में हस्तांतरित किया जा रहा है. संघ ने विश्वास व्यक्त किया है कि सभी खाताधारकों को वे ल ोग सूचित करना चाहते है कि सभी खाताधारकों का बैंक में जमा राशि शत-प्रतिशत सुरक्षित है और यह ठोस आधार के साथ कह रहे हैं, जो कि विभिन्न मापदंडो से साबित होता है. 31 मार्च 2019 के आंकड़ों के अनुसार बैंक की कुल जमा राशि 1759.23 करोड़ रुपये है, जिसमें से कुल 80 फीसदी राशि सरकारी प्रतिभूतियों में निवेशित है, जिससे बैंक बड़ी मात्रा में सूद की राशि अर्जित करती है. 31 मार्च 2019 को बैंक का सीआरएआर 9.26 अंकित किया गया है, जो कि आरबीआइ के मानक के 9 फीसदी से ज्यादा है. वित्तीय वर्ष 2018-2019 के आंकड़ों के अनुसार बैंक की कुल पुंजी 5680.49 लाख है. वित्तीय वर्ष 2017-2018 में 0.4672 करोड़ और वित्तीय वर्ष 2018-2019 में लगभग 15 करोड़ रुपये का परिचालन मुनाफा अर्जित किया गया है. नाबार्डके द्वारा प्रति वर्ष अंकेक्षण किया जाता है, जिसमें नाबार्ड ने को-ऑपरेटिव बैंक में जमा राशि को सुरक्षित बताया है. बैंक की पूरे राज्य में कुल 44 स्थानों पर चल-अचल संपत्तियां है. इसके अलावा बैंक के पास कुल 54 करोड़ की अचल संपत्तियों भी है, जिससे यह साबित होता है कि बैंक का आधार काफी सुदृढ़ है. इन सबके इतर यह भी इन लोगों ने ब ताया है कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा व्यक्तगित स्वार्थ को साधने के लिए बैंक की छवि को धूमिल करने की कोशिश समाचार पत्रों के माध्यम से किया जा रहा है, जो कि बिलकुल तथ्यात्मक नहीं है और उनको कानूनी नोटिस भी बैंक द्वारा जारी किया गया है.




