
चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले के झीकपानी थाना क्षेत्र में चल रहें एसीसी सीमेंट कंपनी प्रबंधन द्वारा मजदूरों पर किये जा रहें अत्याचार को लेकर शुक्रवार को झींकपानी प्रखंड के हाई स्कूल प्रागंण में झारखंड मजदूर कामगार यूनियन केंद्रीय अध्यक्ष जॉन मिरल मुण्डा के नेतृत्व में भाड़ी संख्या में मजदूरों का जुटान हुआ. इस दौरान पहले विचार-विमर्श की गई. उसके बाद मजदूरों द्वारा एक विशाल जुलूस निकाला गया, फिर कंपनी गेट के समक्ष मजदूरों नें अपनी हक के लिए शक्ति प्रदर्शन कर हड़ताल पर जाने से पहले कंपनी प्रबंधन को एक फरवरी से हड़ताल पर जाने की चेतावनी भी दिये. एसीसी सीमेंट प्लान्ट चाईबासा मैनेजमेंट द्वारा गलत नीति अपनाकर मजदूरों के ऊपर शोषण जुल्म कर रहे हैं. कम्पनी के सारे मजदूर मैनेजमेंट से काफी नाराज हैं. इसका मुख्य कारण यह है कि प्रबंधन यूनियन से वार्ता नहीं करती है. पूर्व में मजदूरों के समस्याओं पर यूनियन के साथ प्रबंधन ने कई बार मेरे मध्यस्थता में समझौता कर उचित फैसला लेते हुए बिगड़े माहौल को शान्त किया. कुछ वर्षों से मैनेजमेंट द्वारा अपना निजी लाभ ( कमीशन ) पाने के लिए मजदूरों के हक अधिकारों का हनन कर रहे हैं और उनका शोषण हो रहा है. कोरोना काल में मजदूरों को बिना नोटिस किये बगैर बड़े पैमाने पर बैठाया गया तथा किसी भी प्रकार का लाभ ( ग्रेच्युटी , फुल एण्ड फाइनल तथा कोरोना काल में आर्थिक सहायता ) नहीं दिया गया, जिसका नतीजा है कि आज वे मजदूर दो वक्त की रोजी-रोटी के लिए तरस गये हैं. ये मजदूर मजबूर होकर दूसरे राज्य में काम के लिए पलायन कर रहे हैं. एक तरफ राज्य सरकार पलायन रोकने के लिए निजी कंपनियों में 85 फीसदी स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार मुहैया कराने पर जोर दे रही है, लेकिन इसके विपरीत यहाँ का प्रबंधन कार्य कर रही है. इन परिस्थितियों में कार्यरत मजदूरों में प्रबंधन को प्रति काफी आक्रोश है. कम्पनी प्रबंधन द्वारा भारों के ऊपर किये जा रहे एक अधिकारों का हनन को इस प्रकार देखा जा मजदूरों को बिना नोटिस किये काम से बैठाना तथा किसी भी प्रकार का लाभ ( ग्रेच्युटी , फुल एण्ड फाईनल तथा कोरोना काल में आर्थिक सहायता ), पिछले एक साल से कैंटीन की सुविधा बन्द कर देना और कई वर्षों से चिकित्सा का सुविधा नहीं देना. प्रबंधन पिछले एक वर्ष से सीआर के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में कोई भी मूलभूत सुविधाओं पर कार्य नहीं रही है एवं पिछले साल से ही सीएसआर फण्ड के तहत 25-25 गरीब बच्चों के नामांकन को डीएवी विद्यालय में बन्द कर दिया है. प्रबंधन द्वारा अपने चहेते लोगों को कमीशन के तौर पर ठेकेदारी दिलाना जिससे मजदूरों में धानक एवं मजदूर मजदूरों में आपसी टकराव की स्थिति पैदा करना. उदाहरण के तौर पर-लोडिंग कार्य में अनट्रेंड मजदूरों से काम लेना तथा 12 जनवरी में कार्यरत अनट्रेंड मजदूर का सीमेंट लोडिंग के दौरान दुर्घटना होना, मेसर्स एसएन इन्टरप्राईजेज का सप्लाई मजदूर , साफ – सफाई मजदूर ( सेनिटाईजेशन ठेकेदार – संजय दास ) , रिटायर्ड एसीसी कर्मचारी एवं पूर्व यूनियन महासचिव ( अरविन्द सिंह ) को पुनः ठेका कार्य देना. मशीन द्वारा मजदूरों का विस्थापन किया जाना. मजदूरों को उनके आवास से एसीसी कारखाना के कार्यस्थल तक आने-जाने के लिए प्रबंधन द्वारा बस की सुविधा नहीं होना. इन परिस्थितियों को देखते हुए साफ जाहिर होता है कि चाईबासा सीमेंट प्रबंधन पूरी तरह से अपने निजी लाभ के लिए ठेकेदार तथा मजदूरों के बीच भयादोहन कर रही है. चाईबासा सीमेंट कारखाना प्रबंधन की इस तानाशाही से अंग्रेजों की दमनकारी नीति याद दिलाती है. यह कारखाना संजीवनी की तरह इस क्षेत्र के लिए पिछले कई वर्षों से चलती आ रही थी, स्थानीय ग्रामीणों ने लीज के लिए कभी विरोध नहीं किया लेकिन क्या वजह है जो आज वही गामीण इसका विरोध कर रहे हैं. पूर्व में मजदूर खुशहाल थे, चिकित्सा एवं शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधा यहां के ग्रामीणों को गुणवत्ता रूप से मिल रही थी.



