
जमशेदपुर : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में मंगलवार को की गयी घोषणा के तहत पीएफ पर 2.5 लाख रुपये तक की राशि जमा करने वालों पर टैक्स लगाने में संशोधन कर दिया गया था. इसके तहत प्रोविडेंट फंड को लेकर सरकार ने राहत दी थी, जिसके तहत 2.50 लाख रुपये तक के पीएफ की राशि को बढ़ाकर 5 लाख रुपये तक का दायरा तय कर दिया गया है, ऐसे लोगों के लिए पीएफ पर मिलने वाले ब्याज को टैक्स फ्री माना जायेगा. इसको लेकर टाटा स्टील और टाटा मोटर्स समेत तमाम कंपनियों के कर्मचारी खुश नजर आ रहे थे. टाटा वर्कर्स यूनियन ने जाहिर सी बात है कि इस मुद्दे को केंद्रीय श्रम मंत्री से लेकर संसद समेत तमाम स्थानों पर उठाया भी. इसका नतीजा हुआ कि टैक्स के दायरे में 2.50 लाख रुपये तक के पीएफ की राशि पर मिलने वाले ब्याज की राशि को बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया. लेकिन इसके फैसले में एक अहम बिंदू जोड़ दिया गया है. इसके तहत 5 लाख तक की राशि टैक्स फ्री तब होगा जब पीएफ खाते में नियोक्ता यानी कंपनी प्रबंधन की ओर से कोई योगदान नहीं दिया जाता होगा. लेकिन टाटा स्टील, टाटा मोटर्स समेत टाटा से संबंधित अधिकांश कंपनियां कर्मचारियों के पीएफ में राशि जमा करती है. इसके तहत टाटा स्टील कंपनी प्रबंधन 12 फीसदी पीएफ की राशि जमा करती है जबकि कर्मचारियों के वेतन से 12 फीसदी की कटौती पीएफ के मद में की जाती है. इससे यह साफ होता है कि इसका लाभ टाटा स्टील, टाटा मोटर्स समेत तमाम कंपनियों को नहीं मिलेगा क्योंकि उनके प्रबंधन पैसे उनके पीएफ एकाउंट में देते है.



