रामगोपाल जेना/चाईबासा : झारखंड पुनरुत्थान अभियान आगामी 9 जून को धरती आबा बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि के दिन से पदयात्रा निकालेगी, जो जमशेदपुर के खैरबनी, मनपिटा, बिरसानगर, बारीडीह, बिरसा चौक साकची में बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करने के बाद करनडीह, हाता, राजनगर, चाईबासा, झींकपानी, हाटगमरिया, जैंतगढ़,चंपुआ,रिमिली, क्योंझर, हरिचंदनपुर, सगरपोटा, टोंका, डुबरी के शहीद स्थल वीरभूमि पर पहुंच कर वहां शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किया जायेगा. इसके बाद वहीं समापन सभा का आयोजन किया जायेगा. (नीचे भी पढ़ें)
झारखंड पुनरुत्थान अभियान के संयोजक सन्नी सिंकू ने यहां आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उक्त जानकारी देते हुए बताया कि धरती आबा बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि से यह पदयात्रा इसलिए शुरू की जा रही है क्योंकि धरती आबा बिरसा मुंडा ने जल, जंगल, जमीन की रक्षा करते हुए ही शहादत दी थी. अंतर यह है कि उस समय बिरसा मुंडा, पोटो हो, तिलका मांझी, सिद्धू कान्हू, बुद्धू भगत, गंगा नारायण सिंह, रघुनाथ महतो, तिलंगा खड़िया, शेख भिखारी, उमरांव टिकैत, नीलांबर पीतांबर जैसे अनगिनत झारखंडी पुरखों ने अंग्रेजी सरकार के जमींदारों, ठेकेदारों,सूदखोरों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी. उसी तरह डुबरी में टाटा स्टील के खिलाफ जमीन की रक्षा करते हुए दर्जनों आदिवासियों ने कुर्बानी दी थी. इसके बाद भी टाटा स्टील फाउंडेशन और टाटा ट्रस्ट जैसे बड़े कार्पोरेट अंग्रेजों से भी अधिक उपनिवेशवादी साबित हो रहे हैं.(नीचे भी पढ़ें)
उन्होंने कहा कि इसीलिए टाटा स्टील फाउंडेशन और टाटा ट्रस्ट की संयुक्त पहल पर जमशेदपुर से डुबरी (कालिंगनगर) ओड़िशा तक 286 किलोमीटर लंबा औधोगिक विकास गलियारे के नाम पर आदिवासी मूलवासियों को अनैच्छिक विस्थापित करने वाले विकास गलियारे की योजना बन रही है, जिसे झारखंड व ओड़िशा की सरकारें भी साथ दे रही हैं. उन्होंने इसे विकास के नाम पर क्षेत्र के आदिवासी-मूल वासियों के विनाश का मॉडल करार दिया है.(नीचे भी पढ़ें)
प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल पूर्व राज्यसभा सांसद दुर्गा प्रसाद जामुदा ने कहा कि जमशेदपुर से कालिंगनगर के बीच का यह क्षेत्र मूल रूप से आदिवासी-मूलवासियों का क्षेत्र है. इस क्षेत्र में विकास गलियारा बनने से आदिवासी मूलवासियों की पारंपरिक रूढ़ियों प्रथाओं, संस्कृति और आबादी पर बुरा असर पड़ेगा. इसलिए उक्त क्षेत्रों के निवासियों को जागरूक करने के लिए पदयात्रा का आयोजन किया जा रहा है. पूर्व सांसद चित्रसेन सिंकू ने कहा कि टाटा स्टील फाउंडेशन और टाटा ट्रस्ट का विकास मॉडल आदिवासियों का विनाश करने वाला मॉडल है. इसका असर जमशेदपुर और कालिंगमगर में पहले ही दिख चुका है. (नीचे भी पढ़ें)
जमशेदपुर में जिस प्रकार 9 गांव से शुरू होकर 90 गांव उजड़ गये, उसी तरह डुबरी के 37 आदिवासी गांवों को उजाड़ कर कालिंगनगर में फैक्ट्री स्थापित की गई है और अब फिर विकास गलियारा के नाम पर इन दोनों फैक्ट्रियों के बीच फिर आदिवासियों को विस्थापित करने वाली योजना बनाई गई है. इस विकास गलियारे को स्वीकार करने का मतलब अपने आप को उजाड़ लेना है. झारखंड पुनरूत्थान अभियान के संयोजक पूर्व बैंक कर्मी अमृत मांझी ने कहा कि नौजवान भावी पीढ़ियों को बचाने के लिए अब आदिवासी मूलवासियों के पास संघर्ष के अलावा और कोई विकल्प नहीं है. हम नहीं लड़े तो विस्थापित हो जायेंगें इससे अच्छा तो अपने पूर्वजों से प्रेरणा लेकर लड़ कर मर जाना है. झारखंड पुनरुत्थान अभियान के संयोजक महेंद्र जामुदा ने आदिवासी मूल वासियों को बचाने की इस लड़ाई में सभी से सभी से सहयोग करने की अपील की है.











