
चाईबासा : कोरोना वायरस से बचाव को लेकर देश में लॉकडाउन के कारण कोरोना बंदी की मार बालू उत्खनन और व्यवसाय पर भी पडी है. राज्य सरकार को जहां करोडों का नुकसान उठाना पड़ रहा है, वहीं हजारों की संख्या में मजदूर बेरोजगार हो गए हैं. इतना ही नहीं बालू का उत्खनन नहीं होने से निर्माण भी शुरू नहीं हो पा रहा है. जिसमें भी हजारों श्रमिक जुड़े हैं. पश्चिमी सिंहभूम जिला में 15 बालू घाट हैं, प्रति बालू घाट से राज्य सरकार को एक करोड़ रुपये राजस्व प्रतिवर्ष मिलता है. हर बालू घाट में कम से कम 50-60 मजदूर उत्खनन में लगे होते हैं. वहीं सैकडों ट्रैक्टर, हाइवा और ट्रक बालू ढुलाई में लगे होते हैं. इन सब की रोजगार खत्म हो चुकी है. बालू उठाव का कार्य आरंभ नहीं होता है तो जून के बाद एनजीटी के नियमों के अनुसार बारिश के मौसम उठाव नहीं किया जा सकता है. इससे बालू से जुड़े मजदूरों के रोजगार और राजस्व को भारी क्षति हो सकती है. इस मामले में चाईबासा विधायक दीपक बिरुआ ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अपील करते हुए मांग की है कि जिले में जल्द बालू उठाव को मंजूरी दी जानी चाहिए, ताकि बालू से राज्य सरकार को भी राजस्व मिले और मजदूरों को रोजगार भी मिल सके. जिले के उपायुक्त ने कहा कि जिले के बालू घाटों की नीलामी नहीं होने से भी बड़ी समस्या हो रही है. लेकिन राज्य सरकार इस दिशा में कोई बड़ा कदम उठाने जा रही है. जिससे बालू संकट भी खत्म होगा, राजस्व भी मिलेगा और मजदूरों को रोजगार भी मिलेगा.







