रामगोपाल जेना/चाईबासा : चाईबासा पुराना समाहरणालय कार्यालय के सामने जोहार के संयोजक रमेश जेराई की अध्यक्षता में गुरुवार को समान नागरिक संहिता के विरोध में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया गया. झारखंड पार्टी के नेता रिंयांस सामड की अध्यक्षता में आयोजित धरना प्रदर्शन को पूर्व विधायक बहादुर उरांव ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि देश और झारखंड के आदिवासियों को अपनी सामाजिक, पारंपरिक, प्रथागत कानून को बचाए रखने के लिए समान नागरिक संहिता का विरोध इसी तरह से लगातार करना होगा. (नीचे भी पढ़ें)

उन्होंने कहा कि चूंकि केंद्र में भाजपा की सरकार है, भाजपा देश के संविधान को नहीं, आरएसएस की विचारधारा पर विश्वास करती है. यानी मनु स्मृति पर विश्वास करती है. इसीलिए आज यह प्रस्ताव भी धरना प्रदर्शन में पास कर देना आवश्यक है कि देश के आदिवासी भाजपा नेता होश में आएं. उन्होंने कहा कि भोले-भाले आदिवासियों को सुनाने के लिए भाजपा के आदिवासी नेता कुतुब मीनार से कूदने की बात करते हैं, पर समान नागरिक संहिता बिल का प्रस्ताव भाजपा के एक आदिवासी नेता के द्वारा ही राज्यसभा में लाया जाता है, यह बहुत खतरनाक है. यही भाजपा का चाल, चरित्र और चेहरा है. (नीचे भी पढ़ें)
कंधा भी आदिवासी का और निशाने पर भी आदिवासी है. झारखंड पार्टी के केंद्रीय सचिव सह प्रवक्ता ने मौके पर कहा कि दरअसल समान नागरिक संहिता के बहाने से देश के आदिवासियों की जमीन पर नजर है. वैसे ही जैसे कश्मीर से 370 धारा को हटाकर कश्मीर में किसी को भी जमीन खरीदने का अधिकार दे दिया है. इसीलिए समय रहते आदिवासी मूलवासियों को जागना होगा. समय रहते आदिवासी मूलवासी नहीं जगे तो अपना अस्तित्व खोने में कोई समय नहीं लगेगा. झारखंड पुनरुत्थान अभियान के संयोजक अमृत मांझी ने कहा कि देश और झारखंड के आदिवासियों के अपने सामाजिक, पारंपरिक प्रथागत कानून आज भी प्रचलित हैं. अलग बात है कि नगालैंड, मेघालय और मिजोरम में कस्टमरी लॉ लिखित है, जबकि बाकी देश के आदिवासी समाज के प्रथगत कानून अलिखित हैं. लेकिन भाजपा समान नागरिक संहिता के नाम पर आदिवासियों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ कर रही है. (नीचे भी पढ़ें)
बैठक को हो समाज महासभा के पूर्व महासचिव मुकेश बिरुआ, विख्याक सामाजिक कार्यकर्ता घनश्याम गगराई, झारखंड पुनरुत्थान अभियान के संयोजक सन्नी सिंकू, आदिवासी छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष तुलसी उरांव, इटोर पंचायत के मुखिया सोमनाथ कोया, सरना समिति के पूरन सिंह उरांव, अधिवक्ता वीरसिंह बिरुली, मधुसूदन बानरा, हो समाज महासभा के महासचिव यदुनाथ तियू, अनिल उरांव, नारायण कुदादा और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी संबोधित किया. धरना प्रदर्शन में आदिवासी समाज के दर्जनों महिला पुरुष उपस्थित थे.




