- मानव सेवा में सुदूरवर्ती इलाके की मुखिया ने पेश की मिसाल
- स्वंय ही खाना बनाकर 20 श्रमिकों के पेट की ज्वाला शांत कर रही हैं
- क्वारंटाइन किये गये 20 मजदूरों के लिये मुखिया रोज खुद बनाती हैं सुबह-शाम भोजन
- बच्चों की पढ़ाई के खर्च के लिये रखे पैसों से खरीद रही हैं राशन सामग्री

रामगोपाल जेना
चक्रधरपुर : कोरोना महामारी के तीसरे चरण के लॉकडाउन के बाद प्रवासी मजदूर घर वापसी कर रहे हैं. बंदगांव प्रखण्ड के भालुपानी पंचायत भवन में क्वारंटाइन किये गये 20 मजदूरों के लिये सुबह का नास्ता तथा दो वक्त के भोजन की व्यवस्था भालुपानी मुखिया सावित्री मेलगांडी खुद अपने पैसो से कर रही हैं. वह खुद अपने हाथों से इन मजदुरो के लिए भोजन भी बना रही हैं. मुखिया बताती हैं इस लॉक डाउन में बाहर से आये जो मजदूर पंचायत में रह रहे हैं, उन्हें भोजन की किसी प्रकार की कमी न हो, इसके लिये बच्चों के स्कूल की पढ़ाई के लिये रखे पैसे को भी खर्च कर दिया. अभी तेल, दाल, मसाले आदि राशन दुकान से उधार में लेकर भोजन का व्यवस्था की जा रही है. प्रखण्ड से चावल का मदद किया गया था. उस चावल को गांव के असहाय, गरीबों के बीच बांट दिया गया है. इस वैश्विक महामारी में सरकार द्वारा कराईकेला बाजार में मुख्यमंत्री दाल भात केन्द्र तथा कई पंचायतो में दीदी किचेन के माध्यम से जरूरतमंदो के लिये भोजन की व्यवस्था भी की जा रही है. वहीं प्रदान संस्था द्वारा पंचायत मे सैनिटाइजर, मास्क, मोमबत्ती, फिनायल आद का वितरणा किया गया था. ग्रामीण डर से मजदूरो को गांव में क्वारंटाइन करने का विरोध कर रहे थे. वर्तमान भालुपानी पंचायत भवन में 20 मजदूरों को क्वारंटाइन किया गया है, जिसमें भालुपान पंचायत के ही डोमरा, बडा दामुडीह, छोटा दामुडीह, डुमुरडिया, भालुपानी, डोमरा के मजदूर हैं. वे लॉकडाउन के दौरान बाहर से आये हुए हैं. इनमें से दो मजदूरों का गुरुवार को 14 दिन का क्वारंटाइन पूरा होगा. उसके बाद डॉक्टर द्वारा जांच कर छोड़ा जायेगा. मुखिया बताती हैं, पहले ग्रामीण बाहर से आये मजदूरों का गांव में क्वारंटाइन करने का विरोध कर रहे थे. वे सोच रहे थे कि गांव में कोरोना महामारी फैल न जाये. लेकिन ग्रामीणों को बीडीओ, पुलिस प्रशासन, मुण्डा, मानकी द्वारा समझाया गया, तो वे मान गये. इस महामारी से बचने के लिये सामाजिक दूरी समेत अन्य कई जानकारियां देकर जागरूक किया गया.







