
चाकुलिया : गौ सेवा का भाव देखना है तो चाकुलिया के हवाई पट्टी स्थित ध्यान फाउंडेशन संस्था द्वारा संचालित गौशाला में चले आयें, जहां संस्था के कर्मी बिना मानदेय के गौ सेवा का कार्य कर रहे हैं. लेकिन बांग्ला देश के बॉर्डर से आये मवेशी इतने कमजोर रहते हैं की रोजाना गौशाला मै 6-7 मवेशी मर रहे हैं. मरे मवेशियों को संस्था के कर्मियों द्वारा गड्डा खोदकर दफना दिया जाता है. ध्यान फाउंडेशन संस्था की हेड गायत्री ने दूरभाष पर बताया कि संस्था द्वारा मवेशियों को बचाने का भरपूर प्रयास किया जाता है, परंतु वे इतने कमजोर और बीमार रहते हैं कि इलाज करने के बावजूद भी उन्हें नहीं बचा पाते हैं. कहा कि गौशाला के संचालन में सरकार द्वारा किसी प्रकार का सहयोग नहीं प्राप्त होता है. गौशाला का संचालन संस्था से जुड़े सदस्य और दान में मिली राशि से किया जा रहा है. चाकुलिया के हवाई पट्टी से सटे कोलकाता पिंजरा पोल सोसाइटी शाखा चाकुलिया की 10 एकड़ भूमि लीज पर लेकर ध्यान फांउडेशन संस्था द्वारा संचालित गौशाला में बांगला देश के बॉर्डर से तस्करी के लिए ले जायी जा रही मवेशियों को बीएसएफ के जवान पकड़कर देखभाल के लिए यहां दे जाते हैं. संस्था गौ सेवा कर लोगों के समक्ष एक मिसाल कायम कर रही है.
गौ सेवा के साथ स्थानीय लोगों को मिल रहा है काम : गायत्री ने बताया कि संस्था द्वारा चाकुलिया में गौ सेवा के साथ ही संस्था स्थानीय मजदूरों को रोजगार देने का काम कर रही है. कहा कि वर्तमान में गौशाला में गाय और बैल को खिलाने पिलाने के कार्य के लिए 30-35 मजदूर गौशाला में काम कर रहे है. मजदूरों को संस्था द्वारा साप्ताहिक पेमेंट किया जाता है.
गौशाला मे है 2000 मवेशी : गायत्री ने बताया कि बंगला देश से सटे बॉर्डर से पकड़े गये मवेशी में चाकुलिया गौशाला में 2000 गाय और बैल हैं. संस्था के कर्मियों की देखरेख में गौ सेवा का कार्य किया जा रहा है. वर्तमान में मवेशियों को खिलाने के लिए बिचाली स्थानीय व्यापारी से लिया जा रहा है. गौशाला में बिजली का संयोजन विभाग द्वारा अब तक नहीं किया गया है. बिजली नहीं होने के कारण गौशाला में दैनिक कार्य जनरेटर के भरोसे है. मवेशियों को पानी पिलाने और खिलाने के वक्त जनरेटर चलाकर बोरिंग से पानी निकाला जाता है. गौशाला मे बिजली संयोजन के लिए विभाग को आवेदन दिया गया है, परंतु अब तक संयोजन नहीं किया गया है.
चार एकड़ भूमि पर की जा रही है चारे की खेती : उन्होंने बताया कि गौशाला से सटी चार एकड़ भूमि पर मवेशियों के लिए मकई और घास (चारा) की खेती की जा रही है. बॉर्डर पर पकड़े गए मवेशी काफी कमजोर रहते हैं, उन मवेशियों को अगर हरा चारा दिया जाये तो जल्द ही उनकी सेहत में बदलाव आता है. गौशाला के शेड समेत अन्य के निर्माण कार्य जारी है. संस्था से जुड़े लोग और गौ भक्तों से मिली दान की राशि से सारे कार्य किये जा रहे हैं.



