
नई दिल्ली : छह दिन बाद नए साल की शुरुआत होगी. जो खुशियों के साथ कुछ खर्चे के आपार बोझ भी लेकर आएगी. नए साल पर ग्राहकों को बढ़ते टैक्स का अतिरिक्त बोझ झेलना होगा. नए साल पर ग्रहकों को कपड़े, जूते व आनलाइन खाना पर अधिक जीएसटी देना होगा. गौरतलब है कि 1 जनवरी से रेडीमेड गारमेंट्स पर 5 फीसदी की जगह अब 12 फीसदी जीएसटी भरना होगा. जिससे कपड़े व्यापारियों ने सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहीर की है. 12 फीसदी जीएसटी के खिलाफ व्यापारियों में पहले से ही सरकार के खिलाफ आंदोलन चल रहा है. ये दरे लॉकडाउन के बाद से ही बढ़ने थे परन्तु व्यापारियों में लॉकडाउन में महंगाई की मार को देखते हुए सरकार इसे अब 1 जनवरी 2022 से लागू करेंगी. उद्हारण के तौर पर बताया जाए तो मान लीजिए जूते चप्पल की कीमत 1000 रुपये, जो 5 फीसदी जीएसटी के दायरे में आते है, वहीं इस चप्पल या जूते को बनाने में जो सामाने लगेगी उसमें तली, चिपकाने वाली सामाग्री, कलर आदि पर 18 फीसदी टैक्स लगता है, जिस कारण व्युत्क्रम टैक्स ढांचा लागू होता है.
इसके अलावा चमड़े पर 12 फीसदी टैक्स लगता है. इससे इनपुट टैक्स क्रेडिट लेना होता है और सरकार को रिफंड जारी करना पड़ता है. जूते-चप्पल के मामले में सरकार को सालाना करीब 2,000 करोड़ रुपये रिफंड देना पड़ता है. यही कारण है कि व्यापारियों ने सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे है. (नीचे भी पढ़ें)
वहीं दूसरी ओर आनलाइन खाना मंगवाना भी महंगा पढ़ने वाला है. इसमें फूड डिलीवरी ऐप जोमैटो और स्विगी से खाना ऑर्डर करने पर कंपनियों को 5 फीसदी टैक्स का भी भुगतान करना होगा. हालांकि सरकरा ने पहले ही कह दिया है कि ये टैक्स सरकार ग्राहकों से नहीं बल्कि कंपनियां से लेंगी. परन्तु कंपनियां टैक्स का भुगतान करने के लिए पैसे ग्राहकों से जेब से ही जाएगे.







