
Jamshedpur : कोरोना काल ने नौकरी-पेशा वर्ग के साथ ही टाटानगर रेलवे स्टेशन पर तैनात कूलियों की भी माली हालत बिगाड़ दी है. स्थिति यह है कि परिवार का भरण-पोषण तो दूर उनके लिए अपना पेट भरना भी मुश्किल हो गया है. विगत 22 मार्च से देश भर में लॉकडाउन के बाद से ही कूलियों की यही स्थिति है. केवल टाटानगर रेलवे स्टेशन नहीं, बल्कि अन्य स्टेशनों पर यात्रियों का बोझ उठाने वाले कूलियों की भी कमोबेश यही स्थिति है. ट्रेनों का परिचालन बंद होने के बाद के रेलवे के रनिंग समेत कई विभागों के स्टाफ घर बैठे हैं, तो इन कूलियों की भी आमदनी खत्म हो गयी है. जिन स्टेशनों पर एक-दो ट्रेनें रुकती हैं, वहां कुछ कमा लेते हैं, लेकिन घर चलाना मुश्किल हो रहा है. ऐसे में ये किंकर्तव्यविमूढ़ हैं.
टाटानगर रेलवे स्टेशन पर तैनात कूलियों ने बताया कि विगत 22 मार्च को लॉकडाउन लगने के बाद से ही उनकी आर्थिक स्थिति खराब होती चली गयी. जो पैसे बचा कर रखे थे, वह भी परिवार के भरण-पोषण में खत्म हो गया. खाने के लाले पड़ गये. हाल में यहां के रेल प्रबंधक ने कूलियों के बीच राशन का वितरण किया था, जो कुछ दिन चला. लेकिन अब तो वह भी समाप्त हो चुका है. वर्ष 2008 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने पूरे हिंदुस्तान के कूलियों की ग्रुप डी में भर्ती कर दी. उसके बाद से हम ग्रुप डी में भर्ती की मांग करते रहे, आंदोलन भी किया लेकिन अब तक कोई फायदा नहीं हुआ है. इसके अलावा अब तो स्टेशन में ट्रॉली, लिफ्ट व एक्सलेटर की सुविधा हो गयी है. ऐसे में बहुत कम यात्री ही कूलियों की आवश्यकता महसूस करते हैं. कुल मिला कर भोजन पर भी आफत है, लेकिन राजधानी व पुरुषोत्तम एक्सप्रेस का परिचालन हो रहा है, दोनों ट्रेनें यहां रुकती हैं, जो हम कूलियों के जीने का सहारा हैं.







