नयी दिल्ली: अमेरिका और इजराइल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है. अगर ये जंग लंबी चली और तेल मार्ग ‘होर्मुज स्ट्रेट’ बंद हुआ तो कच्चे तेल के दाम बढ़ सकते हैं. इसका असर भारत में तेल, शेयर बाजार और सोना-चांदी पर दिख सकता है. दिल्ली में पेट्रोल 95 रुपये लीटर से बढ़कर 105 रुपये तक पहुंच सकता है. वहीं डीजल 88 से बढ़कर 96 रुपये तक जा सकता है. इसकी वजह ये है कि भारत अपनी जरूरत का 90 फीसदी तेल आयात करता है. इसमें से करीब 50 फीसदी क्रूड होर्मुज के रास्ते आता है.विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान इस रास्ते को ब्लॉक करता है, तो इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की सप्लाई घट जाएगी और कीमतें 100 से 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं. फिलहाल ब्रेंट क्रूड 70 डॉलर प्रति बैरल के आस-पास ट्रेड कर रहा हैं. भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें सरकारी तेल कंपनियां तय करती हैं. (नीचे भी पढ़े)
पिछले 15 दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की औसत कीमत और डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति पर निर्भर करती हैं. हालांकि कंपनियां बेस प्राइस तय करती हैं. आम आदमी तक पहुंचने वाली अंतिम कीमत में केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के टैक्स का बड़ा हिस्सा होता है. तेल कंपनियां दाम बढ़ाने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन असल में अंतिम फैसला सरकार के रुख पर निर्भर करता है. जब भी युद्ध जैसे हालात बनते हैं, तो सरकार राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए कंपनियों को कीमतें न बढ़ाने का सुझाव दे सकती है या फिर खुद टैक्स घटाकर बढ़ी हुई कीमतों का बोझ जनता पर पड़ने से रोक सकती है. (नीचे भी पढ़े)
सुप्रीम लीडर की मौत के बाद ईरानी सेना जवाबी कार्रवाई के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रही है. इसमें अमेरिकी मिलिट्री बेस को निशाना बनाना और इजराइली इलाकों पर हमला करना शामिल है. लेकिन ईरान के पास सबसे बड़ा ‘जियोपॉलिटिकल हथियार’ होर्मुज स्ट्रेट को बंद करना है. इससे वो पूरी दुनिया की इकोनॉमी पर दबाव बना सकता है. हालांकि होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से ईरान की अपनी इकोनॉमी भी तबाह हो सकती है क्योंकि वह खुद अपना तेल एक्सपोर्ट नहीं कर पाएगा. इसके अलावा, ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीदार चीन है. अगर सप्लाई बाधित होती है तो चीन के साथ रिश्ते बिगड़ सकते हैं.







