
जमशेदपुर : यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन” द्वारा केंद्र सरकार द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण का प्रयास कर रही है और इस कार्य को करने के लिए सरकार “बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट”,1969में संशोधन का प्रस्ताव इस मानसून सत्र में प्रस्तुत करेगी. इसके विरोध में “यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन” के प्रतिनिधियों द्वारा संसद के समक्ष धरना दिया जा रहा है. इस धरना के कार्यक्रम में बैंक वाइज जनरल सेक्रेटरी और अध्यक्ष और स्टेट फेडरेशन के महासचिव और अध्यक्ष को शामिल होने का आह्वान किया था, झारखंड राज्य से ” झारखण्ड प्रदेश बैंक इम्प्लाइज एसोसिएशन” के अध्यक्ष वाईपी सिंह और सह सचिव इस कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं. इस धरना के दौरान “ऑल इंडिया बैंक इम्प्लाइज एसोसिएशन ” के महासचिव ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बैंको का निजीकरण न करने की मांग की है. इसके साथ मांग न मानकर अगर निजीकरण के लिए बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट में संशोधन या कानून लाएगी तो बैंको में आंदोलन तेज होगी और लंबी हड़ताले की जायेंगी, साल दर साल बैंक की शाखाएं कम होती जा थी है. इन लोगों द्वारा मांग की गई की अधिक से अधिक बैंक की शाखाएं खोली जाएं विशेष रूप से गैर बैंकिंग क्षेत्रों में. इसके साथ ही पूर्व नीति आयोग के अरविंद पनगढ़िया और नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च की पूनम गुप्ता द्वारा बैंको के निजीकरण के सुझाव की रिपोर्ट जिसमें निजी बैंको को कुशल बताया है. रिपोर्ट सार्वजनिक क्षेत्र के बैंको के खिलाफ प्रतिशोधात्मक रिपोर्ट है, वे भूल गए की 90% बैड कॉरपोरेट कंपनियों के कारण है. वे भूल गए की कृषि, रोजगार सृजन, गरीबी में कमी, ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वस्थ, महिला सशक्तिकरण आदि के लिए ऋण केवल सरकारी बैंको द्वारा दिया जाता है. निजी बैंक की नगण्य भागीदारी है. दूरस्थ ग्रामीण गांवों/क्षेत्रों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंको की शाखाएं हैं न की प्राइवेट बैंको की. इस धरना में बैंक वाइज जनरल सेक्रेटरी और अध्यक्ष और स्टेट फेडरेशन के महासचिव और अध्यक्ष को शामिल होने का आह्वान किया था. झारखंड राज्य से ” झारखण्ड प्रदेश बैंक इम्प्लाइज एसोसिएशन” के अध्यक्ष कॉम वाई पी सिंह और सह सचिव इस कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं.












