जमशेदपुर: पावन पर्व होली के शुभ अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, कदमा शाखा द्वारा आज “अलौकिक आध्यात्मिक होली” का भव्य आयोजन किया गया. कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी परिवार से जुड़े बड़ी संख्या में भाई-बहनों, श्रद्धालुओं एवं स्थानीय नागरिकों ने भाग लेकर आत्मिक उल्लास और आध्यात्मिक उमंग का अनुभव किया.कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं ईश्वरीय स्मृति के साथ हुआ. वातावरण में आध्यात्मिक गीतों, पुष्प वर्षा और पवित्र संकल्पों की मधुरता ने सभी के मन को आनंदित कर दिया. साथ ही बच्चों द्वारा बहुत ही मनोहर होली पर आधारित नृत्य की प्रस्तुति दी गई.(नीचे भी पढ़े)

इस अवसर पर मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमार अरविंद भाई एवं विशिष्ट अतिथि शशि आचार्य जी उपस्थित रहे. अरविंद भाई ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि सच्ची होली बाहरी रंगों से नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्म प्रेम और ज्ञान के रंग में रंगने से मनाई जाती है. उन्होंने कहा कि काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार रूपी विकार ही वास्तविक होलिका हैं, जिन्हें ज्ञान-अग्नि में स्वाहा करना ही जीवन की सच्ची विजय है. जब मनुष्य देह-अभिमान त्यागकर आत्म-स्वरूप में स्थित होता है, तभी उसका जीवन सुख, शांति और आनंद से भर जाता है.(नीचे भी पढ़े)
कदमा शाखा प्रभारी संजू दीदी ने होली के आध्यात्मिक रहस्य को अत्यंत सरल शब्दों में समझाते हुए कहा कि “होली” का वास्तविक अर्थ है ‘हो ली’,अर्थात् बीती हुई बातों को बिंदी लगाकर समाप्त कर देना. उन्होंने कहा कि बीते हुए दुख, अपमान, कमजोरियां और नकारात्मक संस्कारों को ज्ञान की अग्नि में अर्पित कर देना ही सच्ची होली है. देह-अभिमान को त्यागकर आत्मा की शुद्ध और शांत अवस्था में स्थित होना तथा परमात्मा शिव की स्मृति में रहना ही संगमयुग की अलौकिक होली है.संजू दीदी ने आगे कहा कि रंग केवल शरीर पर लगाने के लिए नहीं हैं, बल्कि मन और संस्कारों को भी प्रेम, पवित्रता, करुणा और सहनशीलता के रंग में रंगना आवश्यक है.(नीचे भी पढ़े)
जब हम परमात्म प्रेम के रंग में रंग जाते हैं, तब जीवन स्वयं एक उत्सव बन जाता है. यही ब्रह्माकुमारीज की सच्ची होली है आत्म जागृति, पवित्रता और विश्व-कल्याण की भावना से युक्त होली.कार्यक्रम के दौरान सभी ने एक-दूसरे को पुष्पों एवं आध्यात्मिक शुभकामनाओं के साथ होली की बधाई दी तथा विश्व शांति, नैतिक मूल्यों की स्थापना और मानवता के कल्याण के लिए संकल्प लिया.अंत में ओम् शांति की गूंज और सामूहिक राजयोग मेडिटेशन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ.







