
जमशेदपुर : देश के विभिन्न राज्यों में कोरोना के मामलों के तेजी से बढ़ने के मद्देनजर कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय सचिव सुरेश सोंथालिया, सिंहभूम चेम्बर के महासचिव भरत वसानी, ज्वेलर्स एसोसिएशन के बिपिन अडेसरा, डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के दिलीप गोयल, थोक वस्त्र विक्रेता संघ के स्वरूप गोलेछा और मोबाइल डीलर एसोसिएशन के गोल्डी ने व्यापारियों को सलाह देते हुए कहा है कि उनके बाज़ारों तथा बाज़ारों में स्थित दुकानों के मालिकों एवं कर्मचारियों द्वारा अनिवार्य रूप से कोविड सुरक्षा के नियमों का पालन ही न करवाएं बल्कि व्यापारियों से संबंधित ग्राहकों को भी अनिवार्य रूप से सुरक्षा मानकों का पालन करने के लिए बाध्य करें. कैट ने यह भी सलाह दी है कि प्रत्येक एसोसिएशन को अपने स्वयं के बाजारों में व्यापारी स्वयंसेवकों को तुरंत तैनात करना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हर राहगीर या दुकानों में आने वाला ग्राहक मास्क पहने हुए हों. यदि किसी को भी मास्क पहने हुए नहीं पाया जाता है तो एसोसिएशन के स्वयंसेवकों को ऐसे लोगों को बिना किसी शुल्क के मास्क देकर पहनने के लिए बाध्य करना चाहिए. कैट ने इसके लिए ” मास्क नहीं तो सामान नहीं” के नारे के साथ पूरे देश में एक अभियान शुरू किया है और व्यापारिक एसोसिएशनों से कहा है कि वो अपने सदस्य दुकानदार को इस बात के लिए निर्देशित करें कि यदि कोई ग्राहक उनकी दुकान पर बिना मास्क के आया है तो उसे तब तक माल नहीं दे जब तक वो मास्क न पहन लें. कैट ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया है कि जिस प्रकार कानून द्वारा हेलमेट एवं सीट बेल्ट लगाने को अनिवार्य किया था, उसी प्रकार एक क़ानूओं द्वारा मास्क पहनने को भी अनिवार्य कर देना चाहिए. कैट के राष्ट्रीय सचिव सुरेश सोन्थालिया ने बताया कि कैट ने व्यापारी संगठनों को एक सलाह देते हुए कहा है कि वे कोरोना मामलों से निपटने के लिए उनकी राज्य सरकार द्वारा उठाये जा रहे, सभी क़दमों में प्रशासन को पूर्ण सहयोग दें. हालांकि, पूरे भारत के व्यापारियों को लगता है कि दुकानें बंद करने का आदेश किसी भी तरह से कोरोना को रोकने का सही सामाधान नहीं है. ऐसा कोई भी निर्णय लेने से पहले दुकानों को बंद रखने के सभी प्रकार के अच्छे और बुरे प्रभावों को देखते हुए एक व्यापक नीति बनानी होगी. केंद्र और राज्य सरकारों दोनों को अर्थव्यवस्था के स्टेक-होल्डर्स के साथ बातचीत कर कोरोना को रोकने के लिए एक सर्वसम्मति वाली रणनीति तैयार करनी होगी जिसके अंतर्गत सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन भी हो और व्यापारिक गतिविधियां भी चालू रह सकें. श्री सोंथालिया ने कहा कि इस राष्ट्रीय आपदा के समय देश भर के 40 हजार से ज्यादा व्यापारिक संगठन केंद्र एवं राज्य सरकार के साथ मिलकर कोरोना की रोकथाम में जुटने को तैयार हैं. श्री सोंथालिया ने बताया कि लॉक डाउन तथा कोरोना से बचाव के मुद्दों को लेकर कैट ने देश भर के व्यापारियों एवं उपभोक्ताओं के बीच एक ऑनलाइन सर्वे शुरू किया है जो 10 अप्रैल को रात्रि 10 बजे तक जारी रहेगा और सर्वे के आधार पर कैट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश भर के व्यापारियों तथा उपभोक्ताओं की राय से अवगत कराएगा.











