जमशेदपुर : भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित तथाकथित ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ पदयात्रा’ दरअसल उसकी राजनीतिक अकर्मण्यता, प्रशासनिक निकम्मेपन और वैचारिक नकारेपन की जीती-जागती मिसाल है. विडंबना देखिए कि पिछले बारह वर्षों से भी अधिक समय से केंद्र की सत्ता पर काबिज भाजपा आज पूरे देश में पदयात्रा निकालकर लोकतंत्र और व्यवस्था बचाने का नारा बुलंद कर रही है. यह अपने आप में हास्यास्पद और आत्मविरोधी राजनीतिक आचरण का उदाहरण है. पूर्वी सिंहभूम जिला कांग्रेस कमिटी के मीडिया चेयरमैन सह प्रवक्ता राजीव मिश्रा ने उक्त पदयात्रा पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि जिस राजनीतिक दल के हाथों में एक दशक से अधिक समय तक देश की बागडोर रही हो, उसे आज लोकतंत्र बचाने और अराजकता हटाने की दुहाई देने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है? क्या यह इस बात का सार्वजनिक स्वीकारोक्ति नहीं है कि भाजपा की नीतियों, कार्यशैली और शासन व्यवस्था ने देश को ऐसी परिस्थितियों में पहुंचा दिया है, जहां लोकतंत्र और सामाजिक सद्भाव को लेकर गंभीर चिंताएं उत्पन्न हो रही हैं? (नीचे भी पढ़ें)
राजीव मिश्रा ने कहा कि भाजपा को पहले अपने गिरेबान में झांककर आत्ममंथन करना चाहिए. देश की जनता महंगाई, बेरोजगारी, आर्थिक असमानता, किसानों की समस्याओं और युवाओं के भविष्य को लेकर लगातार संघर्ष कर रही है. आम नागरिक अपने बुनियादी सवालों के जवाब तलाश रहा है, लेकिन भाजपा इन सवालों का समाधान प्रस्तुत करने के बजाय राजनीतिक यात्राओं, नारों और प्रचार तंत्र के माध्यम से जनता का ध्यान वास्तविक मुद्दों से भटकाने का प्रयास कर रही है. लोकतंत्र केवल नारों, भाषणों और राजनीतिक आयोजनों से नहीं बचता, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता, संवैधानिक मूल्यों के सम्मान, अभिव्यक्ति की आजादी और जनता के प्रति जवाबदेह शासन से मजबूत होता है. लोकतंत्र की रक्षा का दावा करने वालों को यह भी बताना चाहिए कि पिछले बारह वर्षों में लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने क्या ठोस कदम उठाए हैं. (नीचे भी पढ़ें)
राजीव मिश्रा ने आगे कहा कि भाजपा की यह पदयात्रा देश की जनता के साथ एक राजनीतिक छलावा प्रतीत होती है. सत्ता में रहते हुए अपनी जिम्मेदारियों से विमुख होना और फिर विपक्ष या परिस्थितियों को दोषी ठहराकर लोकतंत्र बचाने का नाटक करना, राजनीतिक अवसरवाद की पराकाष्ठा है. यदि भाजपा वास्तव में लोकतंत्र और व्यवस्था के प्रति गंभीर है, तो उसे सबसे पहले अपनी शासन संबंधी विफलताओं, जनविरोधी नीतियों और जवाबदेही से बचने की प्रवृत्ति पर विराम लगाना चाहिए. कांग्रेस पार्टी लोकतंत्र, संविधान, सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्षता और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए सदैव प्रतिबद्ध रही है. कांग्रेस का संघर्ष किसी राजनीतिक दिखावे या सत्ता प्राप्ति तक सीमित नहीं, बल्कि देश की लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक मूल्यों को अक्षुण्ण बनाए रखने का संघर्ष है. (नीचे भी पढ़ें)
भाजपा को अब यह समझना होगा कि देश की जनता अब केवल नारों और राजनीतिक यात्राओं से प्रभावित होने वाली नहीं है. जनता को जवाब चाहिए, रोजगार चाहिए, महंगाई से राहत चाहिए, सामाजिक सद्भाव चाहिए और एक जवाबदेह सरकार चाहिए. लोकतंत्र बचाने का वास्तविक रास्ता सड़कों पर राजनीतिक प्रदर्शन करने से नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करने से होकर गुजरता है. भाजपा की यह पदयात्रा उसकी उपलब्धियों का नहीं, बल्कि बारह वर्षों से अधिक के शासन के बाद भी अपनी विफलताओं को स्वीकार न कर पाने की राजनीतिक विवशता का प्रतीक है.












