जमशेदपुर : भारतीय धातु संस्थान (आइआइएम), जमशेदपुर चैप्टर ने सीएसआइआर – राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (सीएसआइआर-एनएमएल), जमशेदपुर के सहयोग से परमाणु अनुप्रयोगों में सामग्रियों की स्थिति एवं रुझान (स्टेटस एंड ट्रेंड्स इन मैटेरियल्स फॉर फॉर न्यूक्लियर एप्लिकेशंस) विषय पर बर्मामाइंस स्थित सीएसआइआर / एनएमएल सभागार में एक विशेषज्ञ तकनीकी व्याख्यान आयोजित हुआ. भारतीय धातु संस्थान के अध्यक्ष डॉ कोमल कपूर की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में सीएसआइआर-एनएमएल के निदेशक डॉ संदीप घोष चौधरी, आइआइएम के जमशेदपुर चैप्टर के चेयर पर्सन डॉ अतनु रंजन पाल, सीएसआइआर-एनएमएल के मुख्य वैज्ञानिक डॉ एस शिव प्रसाद एवं डॉ रघुवीर सिंह, आइआइएम जमशेदपुर चैप्टर के पूर्व चेयर पर्सन डॉ एएन भगत, मुख्य प्रौद्योगिकी पदाधिकारी डॉ टी भास्कर एवं टाटा स्टील के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजमेंट एवं इंप्लीमेंटेशन रिसर्च तन्मय भट्टाचार्य, सहित सीएसआइआर / एनएमएल, टाटा स्टील, एनआइएच जमशेदपुर एवं अन्य संस्थानों के अनेक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक, धातुकर्मी, अभियंता, शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे. (नीचे भी पढ़ें)

डॉ अतनु रंजन पाल ने आस्वागत भाषण किया तथा चैप्टर के उद्देश्यों, पहलों और विभिन्न तकनीकी एवं व्यावसायिक गतिविधियों की जानकारी साझा की. सीएसआइआर एनएमएल के निदेशक डॉ संदीप घोष चौधरी ने विशिष्ट वक्ता का परिचय कराया और ज्ञान के आदान-प्रदान तथा अनुसंधान संस्थानों, अकादमिक जगत और उद्योग के बीच मजबूत संबंध स्थापित करने के लिए प्रतिष्ठित विशेषज्ञों द्वारा नियमित रूप से विशेष तकनीकी व्याख्यान आयोजित करने के महत्व पर जोर दिया. (नीचे भी पढ़ें)

अपने व्याख्यान में डॉ कोमल कपूर ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में अपने व्यापक अनुभव एवं विशेषज्ञता के आधार पर “परमाणु अनुप्रयोगों में सामग्रियों की स्थिति एवं रुझान” विषय का विस्तृत अवलोकन प्रस्तुत किया. व्याख्यान में परमाणु अनुप्रयोगों के लिए सामग्रियों से संबंधित मौलिक एवं अनुप्रयोग-आधारित दोनों पहलुओं पर चर्चा की गई. उन्होंने परमाणु प्रणालियों की सुरक्षा, विश्वसनीयता, टिकाऊपन तथा दीर्घकालिक कार्य-प्रदर्शन सुनिश्चित करने में उन्नत सामग्रियों की महत्वपूर्ण भूमिका बताई. (नीचे भी पढ़ें)

डॉ कपूर ने अत्यंत चुनौतीपूर्ण परमाणु वातावरण में सामग्रियों से जुड़ी विभिन्न चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला. इनमें अत्यधिक परिचालन परिस्थितियां, संरचनात्मक अखंडता, विकिरण का प्रभाव, संक्षारण, उच्च तापमान पर प्रदर्शन तथा लंबे समय तक सेवा-विश्वसनीयता प्रमुख हैं। उन्होंने परमाणु सामग्रियों के क्षेत्र में उभरते रुझानों एवं तकनीकी विकास की भी जानकारी दी तथा भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए निरंतर अनुसंधान, नवाचार और स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं के विकास के महत्व पर बल दिया.(नीचे भी पढ़ें)
इस विशेषज्ञ व्याख्यान से परमाणु अनुप्रयोगों के लिए विकसित हो रहे सामग्रियों के परिदृश्य की महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई. साथ ही, सुरक्षित, विश्वसनीय एवं सतत परमाणु प्रौद्योगिकियों के विकास में सामग्री विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के महत्वपूर्ण योगदान को भी रेखांकित किया गया. व्याख्यान अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं विचारोत्तेजक रह, जिसने विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों एवं उद्योग जगत के पेशेवरों के बीच विशेष रुचि उत्पन्न की. कार्यक्रम में 200 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. इनमें सीएसआइआर/एनएमएल एवं टाटा स्टील के वैज्ञानिक एवं पेशेवर, विभिन्न संस्थानों के शिक्षक एवं विद्यार्थी तथा व्यापक धातुकर्म एवं सामग्री अभियांत्रिकी समुदाय से जुड़े शोधकर्ता एवं विशेषज्ञ शामिल थे. व्याख्यान के पश्चात एक इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र का भी आयोजन हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने डॉ कपूर से परमाणु सामग्रियों, तकनीकी विकास तथा परमाणु ऊर्जा के भविष्य से संबंधित विभिन्न विषयों पर संवाद किया. कार्यक्रम का संचालन आइआइएम जमशेदपुर चैप्टर के सचिव, डॉ गोपी किशोर मंडल, ने किया तथा उन्होंने धन्यवाद ज्ञापन भी प्रस्तुत किया. यह विशेषज्ञ व्याख्यान ज्ञान-विनिमय, तकनीकी संवाद एवं व्यावसायिक नेटवर्किंग के लिए एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुआ. कार्यक्रम ने धातुकर्म एवं सामग्री अभियांत्रिकी के क्षेत्र में निरंतर सीखने, तकनीकी उत्कृष्टता तथा अकादमिक जगत, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग के बीच सार्थक सहयोग को बढ़ावा देने के आइआइएम जमशेदपुर चैप्टर की प्रतिबद्धता को और मजबूत किया.




