जमशेदपुर : जमशेदपुर के साकची काशीडीह में संचालित डॉ अभिषेक चाइल्ड स्पेक्लिस्ट अस्पताल के ख़िलाफ़ 6 पीड़ित परिवार एकजुट होकर उपायुक्त से न्याय की गुहार लेकर पहुंचे. डॉ अभिषेक द्वारा सागर तिवारी पर हुए रंगदारी के मुकदमे के सभी पंडित परिवार एकजुट होकर आगे आ रहे है. इस तरह के केस सामने आये है, जिसमें कई बच्चों का इलाज तक नहीं हो पाया है. 30 जुलाई को सागर तिवारी द्वारा अपनी बेटी का जांच रिपोर्ट मांगने पर उनके साथ अभद्रता करने पर अपनी बेटी को छुट्टी करा कर ले गए थे जिसके 1 सप्ताह के बाद डॉ अभिषेक ने सागर तिवारी पर रंगदारी का मामला दर्ज करवाया था जिसके खिलाफ जांच के लिए उपायुक्त को ज्ञापन दिया गया. इसी तरह मानगो निवासी विकास शर्मा अपने 3 माह के बच्चे 26 नवंबर 2024 को डॉ अभिषेक के पास लेकर गए थे जहां बच्चे को गंभीर हालत बता कर भर्ती करने कहा गया पर शाम 5 बजे से रात के 9:30 बजे तक भर्ती नहीं किया गया.(नीचे भी पढ़े)
जब बच्चे को तड़पता देख परिजन अस्पताल में दाखिल होकर सवाल करने लगे तो डॉ अभिषेक और उनके बाउंसर विकास और उनकी पत्नी को सड़क पर निकाल कर बुरी तरह पीटा गया (जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुआ) जिसके बाद अपने बच्चे को लेकर दूसरे अस्पताल पहुंचे और दूसरे दिन उन्हें पता चला कि उनके ऊपर साकची थाने में मार पिट का मामला दर्ज हुआ है. वही, नरेश प्रधान आदित्यपुर निवासी अपने 1 घंटे के नवजात बच्चे को डॉ अभिषेक चाइल्ड केयर हॉस्पिटल में 4 जून 2025 को भर्ती करवाया था जिसे सांस लेने में परेशानी थी 1 दिन के बाद डॉ अभिषेक द्वारा बताया गया कि बच्चा बिल्कुल स्वस्थ हैं एक दिन और दूध पिलाने के लिए रखा जाएगा और फिर छुट्टी दे देंगे. दूसरे दिन जब छुट्टी लेने परिजन गए तो डॉ द्वारा बोला गया कि बच्चा स्वस्थ है पर थोड़ा सा जोंडिश का लक्षण है. एक दिन और रख दीजिए. कल छुट्टी कर देंगे अभी बच्चे को नार्मल वार्ड में डाल दिया गया है आप फ़िकर मत कीजिए. लेकिन अचानक दूसरे दिन जब बच्चे से मिलने गए तो परिजन को मिलने नहीं दिया गया और कहा गया कि डॉ अभिषेक आपसे मुलाक़ात करेंगे जब मिलने गए तो बताया गया कि बच्चे का पूरा बॉडी का महत्वपूर्ण अंग खराब हो चुका है. आपका बच्चा 8 घंटे से ज़्यादा ज़िंदा नहीं बचेगा. आप उसे दिल्ली या कोलकाता लेकर जाइए और 6 घंटे के भीतर बच्चे का निधन हो गया. परिजन ने उपायुक्त से गुहार लगाया है कि जब बच्चा स्वस्थ था तो इतना बड़ा बीमारी कैसे हुआ. डॉ अगर पहले दिन ही सही इलाज करते तो बीमारी पकड़ी जाती और मेरा बच्चा ठीक हो सकता था लेकिन डॉ अभिषेक के लापरवाही के कारण अपने बच्चे को खोया है. .(नीचे भी पढ़े)
इसी तरह गोविंदपुर निवासी डॉ अभिषेक अस्पताल के पूर्व मैनेजर शिवशंकर सिंह ने बताया कि वे अस्पताल में काम करता थे. काम के दौरान उनकी पैर की 4 उंगली अस्पताल परिसर में टूट गई थी. इसकी जानकारी देने पर भी कोई इलाज नहीं किया गया और साथ उनको धोखा देकर नौकरी पर नहीं आने के लिए कहा गया. इसके बाद उन्होंने अपना बकाया वेतन की भुगतान के लिए कहा तो नहीं मिलेगा कहकर धमकी दी गई कि जहां जाना है जाओ जिसके बाद में श्रमायुक्त कार्यालय गया जिसके बाद करवाई के बावजूद वहाँ डॉ अभिषेक उपस्थित नहीं हुए और कोई करवाई नहीं हुई. इसके कारण उनका पैसा नहीं मिला जिसके चलते उपायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराए ताकि मुझे इंसाफ मिल सके. गोलमुरी विजयनगर निवासी करुणाकरण अपने 15 वर्ष के बच्चे को डॉ अभिषेक के पास अगस्त महीने में 2024 को भर्ती कराए थे. 4 दिन अस्पताल में भर्ती रखने के बाद दूसरे डॉ चेकअप करने के बाद कहे कि आपको डॉ अभिषेक ने बाहर रेफेर किया है. क्या बच्चे की हालत ठीक नहीं लग रही है जिसके कुछ देर बाद डॉ अभिषेक बच्चे को छुट्टी कराकर घर ले जाने को कहते है कि आपका बच्चा ठीक है जब परिजन ने कहा की बच्चा तो ठीक नहीं लग रहा तो डॉ ने कहा कि दवा और इंजेक्शन का असर घर जाके ठीक हो जाएगा जिसके बाद बच्चे को घर लाया जाता है और 12 घंटे भीतर बच्चे की मौत हो जाती हैं. मनोज शर्मा झारखंड पुलिस अवर निरीक्षक पद पर सरायकेला खरसावा जिला में पदस्थापित है. 23 जून को अपने 9 वर्षीय बच्चे को पेट दर्द की शिकायत को लेकर डॉ अभिषेक के अस्पताल में इलाज कराने गया था . चूंकि, वे राज्य स्वास्थ बीमा योजना के तहत आते है और डॉ अभिषेक अस्पताल भी बीमा योजना अस्पताल के लिस्ट में शामिल है तो उन्होंने अपना कार्ड दिया. इलाज हेतु तो उनका कार्ड को बड़े बुरे तरीके से काउंटर से जमीन पर फेक दिया गया और कहा गया कि इसका कोई महत्व उनके पास नहीं है. यहां इलाज करना है तो पैसा देना होगा जिसके बाद उनके बेटे का इलाज जरूरी था तो उन्होंने 1000 रुपया जमा कराकर इलाज करवाया पर फिर भी वहां ठीक नहीं हुआ तो उन्होंने टाटा मुख्य अस्पताल में जाना पड़ा. राज्य स्वास्थ बीमा योजना में नाम होने के बाद इलाज नहीं करना और उनके स्टाफ और बाउंसर के द्वारा गलत उनके साथ किया गया. सभी परिजन ने उपायुक्त से मिलकर मामले की जांच कराने का आग्रह किया है.











