
जमशेदपुर : जमशेदपुर क्षेत्र में बिजली का टैरिफ को महंगा करने के लिए टाटा स्टील और जुस्को ने संयुक्त रुप से आवेदन दिया है. इस आवेदन को लेकर शुक्रवार को जमशेदपुर के नीलडीह ट्यूब मेकर्स क्लब में जनसुनवाई हुई. इस जनसुनवाई के दौरान बिजली के टैरिफ को लेकर टाटा स्टील के आवेदन पर जनता से राय मांगी गयी थी. हालांकि, एसी क्लब में गिना-चुना लोग ही पहुंचे थे, जिसको जनसुनवाई का रुप दिया गया. इस सुनवाई के दौरान झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग (झारखंड स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन) के चेयरमैन अरविंद प्रसाद, सदस्य पीके सिंह समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद थे.
टाटा स्टील की ओर से भी पदाधिकारी मौजूद थे जबकि जुस्को के अधिकारी भी यहां थे. यहां पहले कंपनी की ओर से प्रेजेंटेशन दिया गया कि किस तरह बिजली को लेकर उनके ऊपर ज्यादा खर्च बढ़ रहा है और किस तरह की दिक्कतें हो रही है. हालांकि, चेयरमैन अरविंद प्रसाद ने इस जनसुनवाई के दौरान कंपनी की रिपोर्ट का ही हवाला देते हुए कहा कि साल में 84 करोड़ रुपये कंपनी बिजली बिल के मद में वसूल रही है और 12 करोड़ सरकार के खाते में जमा करा रही है जबकि उससे पहले 600 करोड़ रुपये बिजली के मद में कमा रही थी जबकि सरकार के खाते में 300 करोड़ रुपये ही जमा करा रहे है.

उन्होंने टाटा स्टील के पावर डिवीजन सेक्शन की खामियों को भी दिखाया और बताया कि कंपनी के अधिकारियों के अलग-अलग सेक्शन की अलग-अलग तरह की रिपोर्ट काफी कंफ्यूजन पैदा कर रहा है. इस अंतर को दूर किया जाना चाहिए. हालांकि, टाटा स्टील के पावर डिवीजन की ओर से बताया गया कि उनके अनुसार 260 करोड़ रुपये कंपनी बिजली मद में वसूल रही है और सरकार को 316 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुकी है. इस पर चेयरमैन ने अधिकारियों को फटकार भी लगायी और कहा कि पहले रिपोर्ट को सुधार कर लें. वैसे आम लोगों ने कहा कि अभी हाल ही में बिजली का रेट बढ़ा था, जिस कारण नहीं बढ़ाया जाना चाहिए. कंपनी हर बार की तरह यह दलील देती दिखी कि बिजली की क्वालिटी को बनाये रखने के लिए जरूरी है कि बिजली का टैरिफ को बढ़ाया जाये और बिजली की दरों में बढ़ोत्तरी की जाये. इसको लेकर व्यवस्था को चाक-चौबंद करने पर फोकस किया गया. हालांकि, नियामक आयोग ने कोई फैसला नहीं सुनाया और कहा कि तीन सप्ताह में टाटा स्टील और जुस्को अपनी रिपोर्ट को दुरुस्त करें, जिसके बाद ही आयोग बिजली का दर बढ़ाने को लेकर किसी तरह का कोई फैसला ले सकेगा.






