
जमशेदपुर : इतिहास में झांके तो ‘टाटा समूह’ के साथ महात्मा गांधी का जुड़ाव 1909 से था, जब टाटा समूह के संस्थापक जमशेदजी नसरवानजी टाटा के छोटे पुत्र सर रतन टाटा ने साउथ अफ्रीका में गांधीजी के कार्यों में सहयोग के लिए 25 हजार रुपये की चेक के साथ एक पत्र भेजा था. इसके बाद, महात्मा गांधी ने 8 अगस्त 1925 को पहली बार जमशेदपुर का दौरा किया था. उनके इस दौरे के दो प्रमुख उद्देश्य थे-मजदूरों के संघर्ष का समाधान करना और भारत के प्रथम योजनाबद्ध औद्योगिक टाउन का अवलोकन करना. अपने प्रवास के दौरान उन्होंने जमशेदपुर और स्टील प्लांट के कई स्थानों का भ्रमण किया. उन्होंने टिस्को इंस्टीट्यूट में मजदूरों को संबोधित किया, जिसे आज यूनाइटेड क्लब के नाम से जाना जाता है. अपने दौरे के क्रम में उन्होंने कहा, ‘‘टाटा साहसिक-कर्म भावना के प्रतीक हैं.’’ उन्होंने राष्ट्र और इसकी जनता के प्रति टाटा की प्रतिबद्धता को दोहराया. ‘हरिजन आंदोलन’को लेकर अपने देशव्यापी भ्रमण के दौरान 4 मई, 1934 को वे दूसरी बार स्टील सिटी पधारे थे. 152 साल जमशेदपुर आगमन के पूरे हो गये है, जिसको टाटा स्टील याद कर रही है. वैसे कुल तीन बार वे जमसेदपुर आये है. पहली बार 8 अगस्त 1925 को आये थे, जिसमें मजदूरों की समस्याों का निराकरण करने के लिए आये थे जबकि दूसरी बार 4 मई 1934 को वे दूसरी बार आये थे और हरिजन आंदोलन में शामिल हुए थे और हरिजन रैली के लिए वहां से फंड का जुटान कराया था. जमशेदपुर में उनका तीसरा दौरा वर्ष 1940 को हुआ था. वे रामगढ़ कांग्रेस की बैठक से लौटते वक्त छोड़ी देर के लिए ही वे आये थे.



