
जमशेदपुर : अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष पवन कवि को एक पीड़ित मां मनोरमा मिश्रा का पत्र मिला है, जिसके माध्यम से उन्होंने अपने बेटे की मौत के मामले की निष्पक्ष जांच के लिए गुहार लगायी है। इस पर प्रदेश उपाध्यक्ष ओर सरायकेला के सैकड़ों लोगों ने मिलकर गत 3 जुलाई को अमित मिश्रा को न्याय के लिए कैंडल मार्च निकाला, जिस पर प्रदेश उपाध्यक्ष पवन कवि ने बताया कि अमित मिश्रा (33) सरायकेला वार्ड नंबर 01(08) के स्थायी निवासी थे, जो कि छत्तीसगढ़ प्रदेश के चापा जिला के प्रकाश इंडस्ट्री प्राइवेट लिमिटेड पर बतौर मैकेनिकल इंजीनियर (एसआईडी) पद पर पिछले 12 वर्षो से कार्यरत थे। पिछले 25 जून की देर रात को उनका असामयिक निधन हो गया, जिसकी सूचना उनकी माता तथा उनके ससुराल वालों को 26 जून की सुबह 10 बजे प्राप्त हुई।

उन्होंने कहा कि मृत्यु की सूचना प्राप्त होते ही उनके ससुराल वाले छत्तीसगढ़ के चापा जिला पहुंचे तो उन्होंने देखा कि परिवार की गैरमौजूदगी में ही शरीर को पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया था तथा जब परिवार के लोगो ने पुलिस से इस विषय पर बात की तब पुलिस का रवैया काफी नकारात्मक था। न तो पुलिस ने घटनास्थल पर प्राप्त अमित मिश्रा के मोबाइल फ़ोन को जब्त किया और न ही अन्य सामानों को जब्त किया। और तो और पुलिस उसके Vomiting Sample (उल्टी का नमूना) को भी लेने पर इनकार कर रही थी, परंतु परिजनों के द्वारा बहुत अनुरोध करने के बाद पुलिस ने Vomiting Sample (उल्टी का नमूना) लिया। लेकिन मृतक के दोनों मोबाइल फोन में बैटरी होने के बाबजूद मोबाइल बंद थे। साथ ही उसका कार गलत तरीके से पार्क किया गया था एवं उसकी खिड़कियां खुली हुई थी। ये सभी संदहे पर जब ध्यान आकृष्ट किया गया तो यह एक सोची-समझी साजिश के तहत की गयी हत्या ही लग रही है। इसके लिए संगठन मुख्यमंत्री तथा उच्च अधिकारियों से बात कर मामले की सटीक जांच के लिए अनुरोध करेगा।




