जमशेदपुर : जून का महीना इंद्रधनुष के जीवंत रंगों के साथ दुनिया को समावेशन, समानता और सम्मान का संदेश देता है. यह 1969 के ऐतिहासिक स्टोनवॉल विद्रोह की याद दिलाता है, जिसने एलजीबीटीक्यूआइए प्लस समुदाय के अधिकारों और गरिमा के लिए वैश्विक आंदोलन को नई दिशा दी. प्राइड मंथ एक वैश्विक उत्सव है, जो एलजीबीटीक्यूआइए प्लस समुदाय की विविधता, पहचान और उपलब्धियों का सम्मान करता है. यह समानता, समावेशन और गरिमा के अधिकारों का समर्थन करने के साथ साथ इस समुदाय के ऐतिहासिक संघर्षों, साहस और और समान अधिकारों की दिशा में हुई प्रगति को भी सम्मानपूर्वक स्वीकार करता है. भारत में विविधता, समानता और समावेशन (डीइआइ) अब केवल एक आकांक्षी कारपोरेट लक्ष्य नहीं, बल्कि उत्कृष्ट कार्यसंस्कृति का एक आवश्यक मानक बन चुका है. अनेक संगठनों ने समावेशी नीतियां और विभिन्न पहलें शुरू की हैं, लेकिन कार्यस्थल पर उनका प्रभावी और समान रूप से क्रियान्वयन अभी भी हर स्तर पर सुनिश्चित नहीं हो पाया है. बढ़ती नियामकीय अपेक्षाओं और सामाजिक रूप से अधिक जागरूक कार्यबल के इस दौर में, अब प्राथमिकता केवल नीतियां बनाने की नहीं, बल्कि उन्हें व्यवहार में उतारकर वास्तविक, सकारात्मक और स्थायी बदलाव लाने की है. वैश्विक स्तर पर मूल्य सृजन और कारपोरेट नागरिकता के उच्च मानकों से प्रेरित होकर, कंपनी के मूल मूल्य और उद्देश्य विविधता एवं समावेशन के प्रति उसकी अग्रणी प्रतिबद्धता का मार्गदर्शन करते हैं. वर्ष 2025 में टाटा स्टील ने अपनी विविधता एवं समावेशन पहल मोजैक के दस वर्ष पूरे होने का जश्न मनाया. वर्ष 2015 में शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य समावेशन को केवल एक नीति नहीं, बल्कि पूरे संगठन की कार्यसंस्कृति और दैनिक अनुभव का अभिन्न हिस्सा बनाना था. (नीचे भी पढ़ें)
मोजैक पाँच प्रमुख रणनीतिक स्तंभों पर आधारित है, नियुक्ति, संवेदनशीलता एवं जागरूकता, प्रतिभा का संरक्षण एवं विकास, अवसंरचना तथा विविधता का सम्मान. यह पहल महिलाओं, दिव्यांगजनों, एलजीबीटीक्यूआइए प्लस समुदाय तथा सकारात्मक कार्रवाई समूहों सहित विभिन्न समुदायों की विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें समान अवसर, सम्मान और समावेशी कार्य वातावरण प्रदान करने पर केंद्रित है. एक दशक पहले शुरू होने के बाद से मोजैक ने टाटा स्टील में समावेशन को बढ़ावा देने वाली अनेक परिवर्तनकारी पहलों को नई दिशा दी है. एक शताब्दी से भी अधिक समय से टाटा स्टील उद्देश्य आधारित और निरंतर विकसित होती कार्यसंस्कृति के निर्माण के लिए कर्मचारी केंद्रित मानव संसाधन नीतियों में अग्रणी रही है. इसी सोच के अनुरूप कंपनी ऐसा कार्य वातावरण विकसित कर रही है, जो समानता, विविधता और समावेशन पर आधारित हो, जहां प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान मिले, उसकी क्षमताओं को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने के अवसर प्रदान किए जाएं तथा ऐसा सशक्त वातावरण तैयार हो, जिसमें हर व्यक्ति अपनी पूरी क्षमता के साथ आगे बढ़ सके. कंपनी के लिए विविधता और समावेशन के प्रति प्रतिबद्धता केवल नीतियां बनाने तक सीमित नहीं है. (नीचे भी पढ़ें)
यह परंपरागत रूप से पुरुष प्रधान माने जाने वाले उद्योगों में स्थापित मानकों को नई दिशा देने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रही है. एलजीबीटीक्यूआइए प्लस और ट्रांसजेंडर कर्मचारियों के लिए विशेष रूप से तैयार की गई प्रगतिशील नीतियों और विभिन्न समावेशी पहलों के माध्यम से कंपनी ने ऐसा कार्यस्थल विकसित किया है, जहां प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान, समान अवसर और अपनी पहचान के साथ आत्मविश्वासपूर्वक कार्य करने का वातावरण मिलता है. एलजीबीटीक्यूआइए प्लस कर्मचारियों को अपने जीवनसाथी या पार्टनर के लिए समान लाभ प्रदान किए जाते हैं, जिनमें व्यापक स्वास्थ्य बीमा, गोद लेने, नवजात शिशु और बच्चों की देखभाल से संबंधित पितृत्व एवं मातृत्व अवकाश, संयुक्त आवास (हाउसिंग) लाभ, स्थानांतरण सुविधाएं तथा टाटा एग्जीक्यूटिव हॉलिडे प्लान (टीइएचपी) के अंतर्गत हनीमून पैकेज जैसी सुविधाएं शामिल हैं. सुरक्षित, सम्मानजनक और समान अवसरों वाले कार्यस्थल के निर्माण के लिए कंपनी ने सभी आधिकारिक भवनों में जेंडर न्यूट्रल शौचालयों की व्यवस्था की है. साथ ही, शिकायतों के प्रभावी निवारण के लिए समर्पित प्रणाली स्थापित की गई है तथा सालभर संवेदनशीलता और जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से नियमित कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है. ट्रांसजेंडर कर्मचारियों के लिए कंपनी ने विशेष स्वास्थ्य सुविधाओं की भी व्यवस्था की है. इनमें जेंडर रीअसाइनमेंट सर्जरी और हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी के लिए स्वास्थ्य बीमा कवरेज, विशेष स्वास्थ्य जांच की सुविधा तथा कंपनी के अस्पतालों में आवश्यकतानुसार प्राइवेट केबिन की उपलब्धता शामिल है. इसके अतिरिक्त, टाटा स्टील विविधता को बढ़ावा देने के लिए विशेष नियुक्ति पहलों के माध्यम से सक्रिय रूप से कार्य कर रही है. (नीचे भी पढ़ें)
इसी प्रयास के तहत कंपनी ने 100 से अधिक ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को रोजगार के अवसर प्रदान किए हैं, जिनमें कोर माइनिंग कार्यों में भारी मशीनरी संचालक भी शामिल हैं. साथ ही, भविष्य की प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए “क्वीरियस” केस स्टडी प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है तथा समावेशी खेल प्रतियोगिताओं का भी नियमित आयोजन किया जाता है. साल 2024 में टाटा स्टील ने नोआमुंडी में भारत की पहली ऑल वीमेन माइनिंग शिफ्ट की शुरुआत कर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की. इसके साथ ही, सेल्फ कंटेन्ड ब्रीदिंग अपरेटस (एससीबीए) से सुसज्जित देश की पहली ऑल वुमेन माइन रेस्क्यू टीम का गठन भी किया गया. टाटा स्टील की यह यात्रा दर्शाती है कि विविधता और समावेशन के लक्ष्य को वास्तविकता में बदलने के लिए केवल नियुक्ति संबंधी पहलें पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए संपूर्ण कार्यप्रणाली में समग्र बदलाव, नेतृत्व की दृढ़ प्रतिबद्धता तथा स्पष्ट जवाबदेही आवश्यक है. कंपनी का अनुभव दर्शाता है कि जब गरिमा और समावेशन को संगठन की कार्यप्रणाली का अभिन्न हिस्सा बनाया जाता है, तो परिचालन दक्षता और सुरक्षा मानकों से समझौता किए बिना समावेशिता को प्रभावी रूप से बढ़ाया जा सकता है. इसी सोच का प्रतीक है प्राइड मंथ, जो केवल एक जश्न नहीं, बल्कि हर दिन अपनापन, सम्मान और समान अवसर सुनिश्चित करने की सतत प्रतिबद्धता का संदेश देता है. यही दृष्टिकोण आज एक समावेशी कार्यस्थल का निर्माण कर, बेहतर और सशक्त भविष्य की नींव रखता है.







