जमशेदपुर : जमशेदपुर जिले (पूर्वी सिंहभूम) के पोटका एवं सीमावर्ती कुछ प्रखडों में मलेरिया के बढ़ते मामलों को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी संवेदनशीलता एवं गंभीरता के साथ स्थिति की लगातार निगरानी कर रहा है. उपायुक्त राजीव रंजन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा मलेरिया की रोकथाम, समय पर जांच, उपचार एवं जनजागरूकता को लेकर व्यापक अभियान संचालित किया जा रहा है. प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सकीय टीमों की तैनाती, घर-घर सर्वे, त्वरित जांच तथा आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है. 29 जून से 03 जुलाई तक एमजीएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के 125 चिकित्सकों की टीम द्वारा पोटका, मुसाबनी, डुमरिया एवं घाटशिला प्रखंडों में विशेष सघन जांच अभियान चलाया गया. अभियान के दौरान संदिग्ध मरीजों की जांच कर आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया गया तथा ग्रामीणों को मलेरिया से बचाव के उपायों की जानकारी दी गई. स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जून माह में सदर अस्पताल में मलेरिया के 59 मरीज भर्ती हुए, जबकि जुलाई माह में अब तक 14 मरीज भर्ती किए गए हैं. (नीचे भी पढ़ें)

कुल 73 में से 31 मरीज उपचार के बाद स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं, इलाजरत 39 मरीजों की स्थिति स्थिर है तथा तीन मरीजों को बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया. निजी अस्पताल में इलाज के दौरान एक और एमजीएम में तीन मौतों की पुष्टि हुई है. सदर अस्पताल में भर्ती मरीजों में 23 पोटका, 10 गोलमुरी सह जुगसलाई, 4 डुमरिया और मुसाबनी के 2 मरीज शामिल हैं. बता दें कि मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में सहिया द्वारा व्यापक स्तर पर हाउस-टू-हाउस सर्वे किया जा रहा है. अब तक पोटका, मुसाबनी, डुमरिया एवं घाटशिला प्रखंड के 17,741 घरों में सहिया कार्यकर्ताओं ने भ्रमण कर लोगों को जागरूक करने का कार्य किया है. साथ ही प्रभावित गांवों एवं संवेदनशील स्थलों पर नुक्कड़ नाटक, होर्डिंग, बैनर, पोस्टर एवं हैंडबिल के माध्यम से लोगों को मच्छरों से बचाव, समय पर जांच तथा उपचार के प्रति जागरूक किया जा रहा है. पोटका प्रखंड से सटे डुमरिया, गोलमुरी-सह-जुगसलाई तथा मुसाबनी प्रखंड के सीमावर्ती कुल 54 गांवों में भी विशेष सर्च अभियान चलाया गया. इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार निगरानी करते हुए बुखार से पीड़ित लोगों की जांच एवं आवश्यक दवाओं का वितरण कर रही है. स्वास्थ्य विभाग ने मलेरिया जांच का दायरा लगातार बढ़ाया है. अब तक 12,872 लोगों की जांच की जा चुकी है, जिनमें 840 व्यक्ति मलेरिया संक्रमित पाए गए हैं. (नीचे भी पढ़ें)
हालांकि व्यापक जांच अभियान एवं त्वरित उपचार के कारण संक्रमित मिलने की दर (पॉजिटिविटी रेट) में लगातार कमी दर्ज की जा रही है, जो नियंत्रण प्रयासों के सकारात्मक परिणाम का संकेत है. सिविल सर्जन डॉ साहिर पाल ने बताया कि जांच अभियान को और प्रभावी बनाने को लेकर पोटका एवं अन्य प्रभावित क्षेत्रों में एमपीडब्लू तथा चिकित्सा कर्मियों की बड़ी संख्या में प्रतिनियुक्ति की गई है. उन्होंने स्पष्ट किया कि आम बोलचाल में प्रचलित ‘ब्रेन मलेरिया’ कोई अलग बीमारी नहीं है. चिकित्सकीय दृष्टि से इसे सेरेब्रल मलेरिया कहा जाता है, जो प्लाज्मोडियम फाल्सीपैरम परजीवी से होने वाले गंभीर मलेरिया की जटिल अवस्था है. यदि मलेरिया की समय पर जांच एवं उपचार नहीं कराया जाए तो संक्रमण मस्तिष्क सहित शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकता है. जिला में सेलेब्रेल मलेरिया के कोई भी मरीज नहीं मिले हैं. किसी भी व्यक्ति को लगातार बुखार, कंपकंपी, तेज सिरदर्द, उल्टी, बेहोशी या भ्रम जैसी स्थिति होने पर तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच करानी चाहिए. समय पर पहचान एवं उपचार से अधिकांश मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं. (नीचे भी पढ़ें)
उपायुक्त राजीव रंजन ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा मलेरिया की रोकथाम को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं. प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की टीमों को सक्रिय रखा गया है तथा जांच, उपचार, दवा वितरण एवं जनजागरूकता अभियान लगातार चलाए जा रहे हैं. उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि बुखार आने पर स्वयं दवा लेने के बजाय तुरंत सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं. मच्छरदानी का नियमित उपयोग करें, घर एवं आसपास जलजमाव न होने दें तथा स्वास्थ्य विभाग की टीमों को सर्वे एवं जांच कार्य में पूरा सहयोग दें. सामूहिक जागरूकता एवं समय पर उपचार से मलेरिया पर प्रभावी नियंत्रण संभव है. प्रभावित क्षेत्रों में मच्छरदानी वितरण किया जा रहा है, साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में फॉगिंग, आईआरएस करवाने के अलावा सभी प्रकार के नालियों के सफाई का कार्य युद्धस्तर पर करने का निदेश दिया गया है.







