जमशेदपुर : केंद्र सरकार की कथित कार्पोरेट परस्त मजदूर विरोधी नीतियों के विरोध में मेडिकल एवं सेल्स रेप्रेजेंटेटिव्स की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के तहत बिहार झारखंड सेल्स रेप्रेजेंटेटिव यूनियन के बैनर तले जिले के करीब 800 मेडिकल एवं सेल्स रेप्रेजेंटेटिव अपनी पांच सूत्री मांगों को लेकर वृहस्पतिवार, 12 फरवरी को एक दिवसीय हड़ताल पर रहे. इन सेल्स रेप्रेजेंटेटिव्स ने पोस्टर-बैनर के साथ उपायुक्त कार्यालय पर धरना दिया. (नीचे भी पढ़ें)

यूनियन की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने कॉर्पोरेट एवं वित्तीय पूंजी के दबाव में विगत 21 नवंबर को 29 मौजूदा कानूनों को खत्म कर 4 लेबर कोड (श्रम संहिता) लागू की है, जिसके चलते 1976 में बना एकमात्र कानून, ‘सेल्स प्रमोशन एंप्लॉईज (सेवा शर्त) एक्ट’ रद्द हो गया है. इससे मेडिकल तथा सेल्स रेप्रेजेंटेटिव्स के लिए बना एकमात्र कानून खत्म हो गया है. उन्होंने कहा कि लंबे संघर्ष के बदौलत हासिल श्रम कानून, जिसकी 2026 में 50वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है, तब इस कानून को खत्म किया जा रहा है. (नीचे भी पढ़ें)
उन्होंने कहा कि मजदूरी संहिता (वेज को़ड) के अंदर न तो न्यूनतम मजदूरी की कोई परिभाषा है और न निर्धारण का कोई फॉर्मूला. फ्लोर लेवल वेजेज, जो बहुत कम है, उसकी प्रस्तावना है. कताम के घंटे 8 से 12 हो जाएंगे. आज के दिनों कंपनियां 8 घंटा फील्ड वर्क के उपरांत ऑनलाइन मीटिंग के जरिया 10 से 12 घंटे तक काम ले रही हैं. लेबर कोड के अंतर्गत फिक्स्ड टर्म इंप्लॉयमेंट यानी एक निश्चित अवधि के लिए काम होगी और टर्म खतम होने के उपरांत सर्विस नवीकरण होने की कोई गारंटी नहीं होगी. (आइआर कोड) यूनियन बनाना एवं हड़ताल करना, जो मजदूर का मौलिक अधिकार है, लगभग नामुमकिन हो जाएगा. उन्होंने कहा कि देश की 10 प्रमुख यूनियनें एवं स्वतंत्र औद्योगिक फेडरेशन लंबे समय से इसका विरोध करती आ रही हैं. मजदूरों के प्रतिरोध के चलते संसद में धोखे से पास करने के बावजूद सरकार इसे लागू नहीं कर पाई थी, लेकिन पूंजी एवं कॉर्पोरेट के इशारे पर मजदूर हितों को सरेंडर किया गया है. (नीचे भी पढ़ें)
आज धरने पर बैठे सेल्स रेप्रेजेंटेटिव्स ने धरना मंच से सेल्स प्रमोशन इंप्लॉईज एक्ट की हर हाल में रक्षा करने, अपने लिए वैधानिक कार्यप्रणाली बनवाने एवं अस्पताल जैसे कार्य क्षेत्र में कार्य करने का अधिकार सुरक्षित करने के लिए केंद्र सरकार से मांग रखी गई. उन्होंने अपनी अन्य मांगों में राज्य सरकार से 26910 रुपये न्यूनतम मजदूरी एवं 8 घंटे काम के अधिकार को सुनिश्चित करने की मांग केंद्र सरकार से की गई. इसके साथ ही, अन्य मांगों में कंपनी मालिकों से सेल्स के नाम पर प्रताड़ना और गैजेट के माध्यम से गैर कानूनी निगरानी एवं ट्रैकिंग रोकने की मांग भी शामिल है. (नीचे भी पढ़ें)
बीएसएसआर यूनियन के जिला अध्यक्ष यशवंत देशमौली ने सरकार की कथित देश विरोधी नीति का विरोध करते हुए देश के हित में नीति बनाने की मांग की. वहीं प्रदेश सचिव पीयूष गुप्ता ने आर-पार की लड़ाई का आह्वान किया. जिला सचिव विनय कुमार ने कहा कि चार श्रम संहिता किसी भी कीमत पर मान्य नहीं होगी. धरने में उपस्थित अन्य सहकर्मियों से अपने अधिकार की रक्षा के लिए एकजुट रहने की अपील की. अंत में उपायुक्त के माध्यम से केंद्र सरकार की श्रम मंत्री एक ज्ञापन सौंपा गया. प्रदर्शनकारियों ने नये लेबर कोड की प्रतियां भी जलाईं.







