जमशेदपुर : जमशेदपुर के सांसद विद्युत बरण महतो ने नियम 377 के अंतर्गत हीमोफीलिया रोग का मामला संसद में उठाया. सांसद श्री महतो ने कहा कि यह एक लाइलाज रक्तस्राव संबंधी बीमारी है, जिसमें रोगी के शरीर में रक्त का थक्का बनने की क्षमता बहुत कम होती है. ऐसे रोगियों, विशेषकर बच्चों को सामान्य जीवन जीने के लिए जीवनभर फैक्टर-आठ आधारित उपचार की आवश्यकता होती है. पूर्व में उपचार ताजा रक्त या प्लाज्मा से किया जाता था, जो अधिक प्रभावी नहीं था. बाद में रक्त से बने फैक्टर-आठ का उपयोग हुआ, किंतु इससे कुछ रोगियों में एचआइवी व एड्स तथा हेपाटाइटिस बी जैसे संक्रमण के मामले भी सामने आए. इसके बाद रिकॉम्बिनेंट फैक्टर-आठ और विस्तारित अर्ध-आयु फैक्टर-आठ उपलब्ध हुए, जिन्हें सप्ताह में कई बार नस के माध्यम से देना पड़ता है. (नीचे भी पढ़ें)
हाल के वर्षों में फैक्टर-आठ मिमिक एमिसिज़ुमैब नामक औषधि आई है, जो त्वचा के नीचे महीने में केवल एक बार दी जाती है और इससे रक्तस्राव लगभग समाप्त हो जाता है. इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने भी इसे प्रभावी उपचार बताया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2025-26 में इस औषधि को आयात शुल्क और जीएसटी से मुक्त किया है. इसके बावजूद नेशनल हेल्थ मिशन के स्तर पर विशेषकर झारखंड में रोगियों को यह औषधि उपलब्ध नहीं कराई जा रही है. सांसद ने आग्रह किया है कि मंत्री देश के सभी हीमोफीलिया-ए रोगियों को एमिसिज़ुमैब उपलब्ध कराने हेतु आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं.




