जादूगोड़ा : जादूगोड़ा थाना क्षेत्र के झरिया गांव के निवासी 26 वर्षीय रितिक सिंह की ब्रेन मलेरिया के इलाज के लिए रांची के रिम्स अस्पताल ले जाने के क्रम में रास्ते में मौत हो गई. ऊपर से परिवार की गरीबी इतनी कि उसके दाह संस्कार तक के लिए पैसे नहीं बचे. मृतक के पिता विजय सिंह, बहन अंजली सिंह, चाचा बाबूलाल सिंह ने झारखंड सरकार से मृत रितिक सिंह के दाह संस्कार के लिए आर्थिक मदद की गुहार लगाई है. चाचा बाबूलाल सिंह ने बिलखते हुए कहा कि इलाज में 30 हजार रुपये खर्च हो गए. घर में पैसे नहीं है कि मृतक रितिक के दाह-संस्कार का खर्च उठा सकें. (नीचे भी पढ़ें)

घटना के बाबत मृतक रितिक सिंह की बहन अंजली ने बताया कि बीते 5 जून को ब्रेन मलेरिया ने उसे अपनी चपेट में ले लिया. घर पर दो दिन रहने के बाद बी स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं होने पर उसे गालूडीह के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां बीते 10 जून को उसे छुट्टी दे दी गई, लेकिन उसकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो दोबारा उसे उसी अस्पताल में ले जाया गया जहां से उसे जमशेदपुर सदर अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई. लेकिन हालत ठीक नहीं देख वहां से डॉक्टरों ने उसे एमजीएम अस्पताल रेफर कर दिया और वहां से भी डटक्टरों ने रिम्स भेज दिया. रिम्स की अधिक दूरी के मद्देनजर परिजनों ने रितिक को रास्ते में ही एक अस्पताल में भर्ती करा दिया, जहां उसकी मौत हो गई. अंत में उसे निजी वाहन से जादूगोड़ा के झरिया गांव लाया गया व शनिवार को गांव में ही देर संध्या अंतिम संस्कार कर दिया गया. ब्रेन मलेरिया से रितिक की मौत से पूरे झरिया गांव में सन्नाटा पसरा है व ग्रामीण डर के साए में जी रहे हैं. मृतक के पिता विजय सिंह एक दिहाड़ी मजदूर है. (नीचे भी पढ़ें)

बताते चलें कि पोटका में अब तक कुल छह लोगों की मौत ब्रेन मलेरिया से हो चुकी है. जिले सिविल सर्जन डॉ साहिर पॉल ने पोटका में ब्रेन मलेरिया पर नियंत्रण के लिए चिकित्सकों की फौज उतार दी है. उसके बाद भी ब्रेन मलेरिया से मौतों का सिलसिला जारी है. ब्रेन मलेरिया से छह मरीजों की मौत के बाद पोटका के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के प्रभारी रजनी कांत महाकुड को निलंबित कर उनकी जगह डॉ सुकांत सीट को नया प्रभारी बनाया गया है. अब नए प्रभारी के सामने ब्रेन मलेरिया से हो रही मौतों को रोकना सबसे बड़ी चुनौती है




