गालूडीह: सुवर्णरेखा नदी पर स्थित गालूडीह बराज डैम अब स्थानीय मछुआरों के लिए रोजगार का महत्वपूर्ण साधन बन गया है. प्रतिदिन सुबह से ही दर्जनों मछुआरे डैम के ऊपर से जाल डालकर विभिन्न प्रजातियों की मछलियां पकड़ रहे हैं. ताजी मछलियों की बिक्री 70 से 80 रुपये प्रति किलो की दर से आसपास के गांवों और बाजारों के लोग बड़ी संख्या में खरीदारी के लिए पहुंच रहे हैं. मछुआरों का कहना है कि बरसात के मौसम में डैम में मछलियों की उपलब्धता बढ़ जाती है, जिससे उनकी आमदनी में भी इजाफा होता है. कई परिवार पूरी तरह मछली पकड़ने और बेचने के कार्य पर निर्भर हैं. सुबह पकड़ी गयी मछलियां दोपहर तक बिक जाती हैं, जिससे उन्हें रोजाना नकद आय प्राप्त हो रही है. (नीचे भी पढ़ें)
स्थानीय लोगों का कहना है कि बाजार की तुलना में डैम पर ताजी मछली कम कीमत में मिल जाती है. इससे उपभोक्ताओं को भी फायदा हो रहा है और मछुआरों को नियमित रोजगार मिल रहा है. गालूडीह बाजार में मछलियों की कीमत 200 से 300 रुपये प्रति किलो है. गालूडीह बराज मुख्य रूप से सिंचाई और जल प्रबंधन के लिए बनाया गया था, लेकिन समय के साथ यह पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय लोगों की आजीविका का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है.







