गालूडीह: परंपरागत खेती से हटकर आम की बागवानी अपनाकर छोलागोड़ा गांव के बजीरडांगा टोला निवासी युवा किसान उपेंद्र महतो ने आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है. वैज्ञानिक तरीके से आम के बगीचे का विकास कर वह अच्छी आमदनी अर्जित कर रहा है. इससे न केवल उसके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि आसपास के किसान भी बागवानी की ओर प्रेरित हो रहे हैं. किसान ने बताया कि उन्होंने करीब चार साल पहले बंजर पड़ी जमीन पर मनरेगा योजना से आम के 150 पौधे लगाये. (नीचे भी पढ़े)
अब सालाना एक लाख रुपये से अधिक आमदनी कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि शुरुआत में मेहनत और धैर्य की आवश्यकता होती है, लेकिन पेड़ फल देने लगने के बाद हर वर्ष अच्छी आय प्राप्त होती है. उचित सिंचाई, समय पर खाद, कीट नियंत्रण और देखभाल से उत्पादन भी बेहतर होता है. आम की बागवानी किसानों के लिए दीर्घकालिक और लाभदायक विकल्प है. यदि आधुनिक तकनीकों और बेहतर प्रबंधन के साथ इसकी खेती की जाए, तो किसान कम लागत में बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं.







