चाकुलिया : चाकुलिया के ग्रामीण क्षेत्रों में ताड़ और खजूर के पत्तों की कटाई करनी ग्रामीणों ने शुरू कर दी है। ऐसा होना झारखंड के महान पर्व मकर संक्रांति की दस्तक का संकेत है। मकर संक्रांति का पर्व शिघ्र ही आने वाला है। पिछले 1 सप्ताह से ग्रामीण इलाकों में ग्रामीण ताड़ और खजूर के पत्तों की कटाई करने में जुटे हैं। इन दिनों में स्कूली बच्चे भी ताड़ और खजूर के पत्ते की कटाई में जुटे हैं। काटे गए पत्तों को धूप में सुखा रहे हैं। ताकी मकर संक्रांति के दिन सुबह में स्नान कर इन सूखे पत्तों से बनाए गए कुंभों को जलाकर आग ताप सके। (नीचे भी पढ़ें)

ज्ञात हो कि ग्रामीण इलाकों में मकर संक्रांति का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। वर्ष 2023 में मकर सक्रांति 14 जनवरी को है। ग्रामीणों ने ताड़ और खजूर के पत्तों की कटाई शुरू कर दी है। ग्रामीण जल स्रोत से लेकर गांव तक इन पत्तों से छोटा-छोटा कुंभे बनाते हैं। स्नान करने के बाद ग्रामीण इन कुंभ में आग लगा देते हैं और आग तपते हुए अपने घर जाते हैं। बड़ी नदियों के किनारे तो सूखे पत्तों से 50 से 100 मीटर तक ऊंची कुंभा बनाए जाते हैं। एक समय था जब मकर संक्रांति के पूर्व 1 माह पहले से ग्रामीण इलाकों में टुसू गीतों से गुंजने लगता था, खेत और खलिहान और मिल फैक्ट्रियों में काम करती महिलाएं टुसू गीत गाया करती थी परंतु पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव के कारण अप टुसू गीत गुम सा हो गया है। मकर संक्रांति के आने में महज कुछ दीन ही शेष है परंतु कहीं भी टुसू गीत सुनाई नही पड़ रही है।



