
घाटशिला : पूर्वी सिंहभूम जिला के घाटशिला अनुमंडल कार्यालय के महज 1 किलोमीटर के दायरे में बसा हरिजन बस्ती में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है. कई साल पहले सरकार द्वारा इनको बसाया गया था जिसमें सबके लिए पक्का मकान भी बनाया गया था. इस बस्ती में कुल 45 परिवार निवास करते हैं. बस्ती में रह रहे लोगों ने बताया कि वर्षो पूर्व निर्मित पक्का घर अब मरम्मत के अभाव में जर्जर हो चुका है,घर के छत से पानी चूता है. लोगों ने कहा कि बारिश के समय में उन्हें घर पर रहने में काफी परेशानी होती है. अत्यधिक बारिश होने पर रात भर जग कर गुजारना करना पड़ता है. ग्रामीणों ने बताया कि वर्तमान में बस्ती वासियों के लिए सबसे बड़ी समस्या शौचालय की है. कहा कि यहां किसी भी घर में शौचालय नहीं है. बस्ती में एक सामूहिक शौचालय है पर वह इस्तेमाल लायक नहीं है. मजबूरन इस बस्ती के लोग बाहर झाड़ियों और खेतों में जाकर शौच करना पड़ता हैं. बस्ती की महिलाओं का कहा है कि वे अपने आप को असुरक्षित महसूस करती है. महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले और सूरज डूबने के बाद घर से बाहर खुले में शौच करने जाती है. सरकार हर गांव टोला में स्वच्छता अभियान के तहत घर-घर में शौचालय का निर्माण कराया परंतु इस बस्ती में एक भी शौचालय का निर्माण नहीं कराया गया है. सरकारी पदाधिकारियों की लापरवाही के कारण बस्ती के लोग सरकारी योजना के लाभ पाने से वंचित है. सरकार तो बड़ी बड़ी दावे करती हैं कि स्वच्छ भारत अभियान के तहत हर घर में शौचालय बनाई गई, लेकिन जमीनी हकीकत देखना है तो घाटशिला के इस हरिजन बस्ती में आकर देखें कि अभियान की दावा कैसे खोखली साबित हो रही है. यहां की महिलाएं बताती हैं कि यहां पर 45 घरों में लोग रहते हैं जो पानी की समस्या से जूझ रहे हैं . यहां केवल एक बिजली से संचालित जल मीनार बना है उसी से काम चलाते हैं. वही अगर बिजली में खराबी आयी तो एक सप्ताह तक पानी नहीं मिल पाती है. उस वक्त बस्ती के लोगों को 3 किलोमीटर दूर जाकर पानी ढोकर लाना पड़ता हैं तब जाकर घर में खाना बन पाता है. ग्रामीणों ने बताया कि चापाकल तो लगाया गया है परंतु कुछ दिनों बाद ही ठप हो गया है. चापाकल मरम्मत के लिए कई बार आवेदन भी प्रखंड कार्यालय में दिया गया है परंतु कोई पहल नहीं किया गया जिससे लोगों में विभाग के पदाधिकारियों के प्रति आक्रोश है.




