जमशेदपुर : केंद्रीय ट्रेड यूनियन मंच द्वारा 9 जुलाई को प्रस्तावित देशव्यापी आम हड़ताल के मद्देनजर सोमवार को जमशेदपुर के गोलमुरी टिनप्लेट वर्कर्स यूनियन में केंद्रीय ट्रेड यूनियन मंच कोल्हान की बैठक हुई. इस दौरान एक संवाददाता सम्मेलन को आयोजित किया गया, जिसमें मुख्य रूप से झारखंड इंटक के अध्यक्ष राकेश्वर पांडेय ने संबोधित किया. उसके साथ-साथ सीटू से विश्वजीत देव, इंटक से विनोद राय, संजीव श्रीवास्तव, विजय खां, परविंदर सिंह, मनोज सिंह, विनय त्रिवेदी, ददन सिंह, एटक से अंबुज ठाकुर, संजय कुमार सहित अन्य लोग मौजूद रहे. इन लोगों ने बताया कि इस हड़ताल को वे लोग सफल बनायेंगे. इससे पहले 8 जुलाई को शाम 6:30 बजे साकची आमबगान मैदान से साकची गोलचक्कर तक मशाल रैली का आयोजन किया जाएगा. इन लोगों ने बताया कि ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच द्वारा 20 मई को प्रस्तावित श्रमिकों की राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल को स्थगित करते हुए 9 जुलाई को पुनर्निर्धारित किया गया है. 17 सूत्री मांगों और राज्यस्तरीय मांगों को लेकर मजदूरों के बीच सघन प्रचार-प्रसार एवं जनसम्पर्क कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिसमें प्रमुख मांग मजदूरों के अधिकार और सुरक्षा को छिनने वाली चारों श्रम संहिताओं (लेबर कोड) को वापस लेने की है, जिन्हें सितम्बर 2020 में संसद में अलोकतांत्रिक तरीके से पारित कर दिया गया था, लेकिन मजदूरों के लगातार प्रतिरोध के कारण अब तक लागू नहीं किया जा सका. (नीचे भी पढ़े)
लेकिन केन्द्र सरकार के इशारे पर और कॉरपोरेट के दबाव में विभिन्न राज्य सरकारें इसके प्रावधानों को पिछले दरवाजे से लागू करने का प्रयास कर रही हैं और केन्द्र सरकार मजदूरों के लगातार विरोध को नजरअंदाज कर इसे अधिसूचित करने पर तुली हुई है. हड़ताल का समर्थन संयुक्त किसान मोर्चा ने किया है. झारखंड के कई क्षेत्रीय और स्थानीय ट्रेड यूनियनों ने भी हड़ताल में शामिल होने का फैसला किया है. महिलाओं, युवाओं, छात्रों के साथ-साथ लेखकों और सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं के विभिन्न जन संगठनों ने भी हड़ताल और इसकी मांगों के प्रति एकजुटता व्यक्त की है. संयुक्त मंच की ओर से बताया गया कि मौजूदा 29 श्रम कानूनों को ख़त्म करके चार नए श्रम संहिताएं लागू करना, मज़दूरों की मांगों के मुताबिक़ नहीं, बल्कि कॉरपोरेट्स को खुश करने के लिए किया गया है. केंद्र और कई राज्य सरकारों के संरक्षण में नियोक्ता वर्ग मजदूरों पर हमले जारी रखे हुए है. काम के घंटों में मनमानी वृद्धि, न्यूनतम मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा संबंधित मौजूदा कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन तथा मजदूरों की गैरकानूनी छंटनी आम हो गई है. यह सब श्रम संहिताओं को लागू करने की साजिश का हिस्सा है. ट्रेड यूनियनों की लगातार मांग के बावजूद केंद्र सरकार ने अब तक न तो ट्रेड यूनियनों का प्रतिनिधिमंडल से वार्ता की है, न ही पिछले 10 वर्षों से लंबित भारतीय श्रम सम्मेलन बुलाया है. इन चारों श्रम संहिताओं के लागू हो जाने पर, नियोक्ताओं को मिलने वाली छूटों के साथ-साथ बदली हुई परिभाषाओं और प्रावधानों के कारण, अधिकांश श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी, बोनस, काम के घंटे, ओवरटाइम, अवकाश, कार्यस्थल पर मिलने वाली सुरक्षा और सुविधाओं, बोनस, भविष्य निधि, ग्रेच्युटी से वंचित होना पड़ेगा. इसके साथ ही, स्थायी नौकरी की प्रकृति में फिक्स्ड टर्म, केजुलाइजेशन और ठेका कार्य की अनुमति के साथ-साथ क्षेत्र और कार्य-पद्धति विशेष कानूनी सुरक्षाओं के समाप्त होने से औद्योगिक और रोजगार संबंधों में प्रतिकूल परिवर्तन आएगा. इसके अलावा, संगठित होने यानी यूनियन बनाने, सामूहिक सौदेबाजी, लोकतांत्रिक विरोध के अधिकारों को न केवल हाशिए पर डाल दिया जाएगा, बल्कि जनवादी गतिविधियों के लिए दंड का प्रावधान भी श्रम संहिताओं में रखा गया है. इन लोगों ने बताया कि 9 जुलाई को विभिन्न कार्यस्थलों पर हड़ताली कर्मचारियों के विरोध प्रदर्शनों के अलावा, विभिन्न संगठनों के साथ सुबह 11:30 बजे साकची आमबगान मैदान से एक विशाल विरोध रैली निकाली जाएगी, जिसके बाद साकची गोलचक्कर पर प्रदर्शन होगा.



