
जमशेदपुर : केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने झारखंड की सरकार पर तीखा हमला किया है। श्री मुंडा ने सरकार की कार्यशैली पर करारा हमला करते हुए कहा है कि झारखंड में संविधान का उल्लंघन हो रहा है। झारखंड में संविधान की हत्या हो रही है। आज पूर्वान्ह में वेबिनार के माध्यम से पूर्वी सिंहभूम जिला के प्रमुख कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित करते हुए श्री मुंडा ने कहा कि टीएसी के मामले में राज्यपाल के अधिकारों को छीनने का प्रयास किया जा रहा है। यह सरासर संविधान का उल्लंघन है ।उन्होंने कहा यही स्थिति रही तो कल को लोग यह भी कर सकते हैं वे लोग राज्यपाल के समक्ष शपथ ना लेकर स्वयं ही सरकार बनाएं और स्वयं ही शपथ भी ले ले ।श्री मुंडा ने कहा कि कल भगवान बिरसा मुंडा की शहादत दिवस है। क्या बिरसा मुंडा ने इसी दिन के लिए अपनी शहादत दी थी कि आदिवासियों के हक और अधिकार छीने जाएं। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर सीधा हमला करते हुए कहा कि आज जो लोग इस प्रकार के कार्य कर रहे हैं वही लोग सीएनटी एक्ट में छेड़छाड़ के लिए जिम्मेवार है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा सीएनटी एक्ट में छेड़छाड़ के लिए समिति बनी थी उसमें समिति के चेयरमैन तत्कालीन वित्त मंत्री और आज के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ही हैं। (नीचे भी पढ़ें)
उन्होंने कहा कि आज जरूरत है उनके शहादत दिवस पर हम सभी संकल्प लें कि बिरसा मुंडा और हुल दिवस के नायकों का शहादत बेकार नहीं जाए। वेबिनार में इससे पूर्व उन्होंने संबोधित करते हुए कहा की केंद्र सरकार पहले से ही संपूर्ण टीकाकरण अभियान का 75% राशि खर्च कर रही थी ।कई राज्य ऐसे थे जो 25% की राशि भी खर्च करने में आनाकानी कर रही थी। उसे इस देश के प्रधानमंत्री भाई नरेंद्र मोदी ने भरपाई कर दी। उन्होंने विस्तृत आंकड़ा देते हुए बताया कि किस प्रकार झारखंड की सरकार ने जनवरी माह से लेकर अब तक टीका के उपयोग में कोताही और लापरवाही बरती है साथ ही टीका का दुरुपयोग किया है। बैठक में कार्यकर्ताओं को आगाह करते हुए श्री मुंडा ने कहा की कोरोना के तीसरी वेभ की संभावना से बिल्कुल इनकार नहीं किया जा सकता है । इसलिए संपूर्ण टीकाकरण समय की मांग है और अभी लापरवाह होने के बजाय सजग होने की जरूरत है ।उन्होंने कार्यकर्ताओं को आयुष मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराया गया इम्यूनिटी बूस्टर के दवाओं के वितरण पर भी जोरदिया। आज के वेबिनार में मुख्य रूप से सांसद विद्युत वरण महतो, डॉ दिनेशानंद गोस्वामी, मेनका सरदार, गुंजन यादव, चंद्रशेखर मिश्रा, विनोद सिंह, राजकुमार श्रीवास्तव, नंदजी प्रसाद, अनिल सिंह, दिनेश साव, चंडी चरण, सौरव चक्रवर्ती, अनिल मोदी, जीतेन्द्र राय, संजीव कुमार सहित दर्जनों कार्यकर्ता शामिल थे।





